सावधान! मार्केट में आया नया स्कैम: “मैं रोबोट नहीं हूं” कैप्चा पर क्लिक करना पड़ सकता है महंगा — एसपी दीपक सहारन

अनजान ईमेल लिंक पर क्लिक करने से पहले भेजने वाले का पता और URL अवश्य जांचें — एसपी

ऐलनाबाद, 23 जनवरी (एम. पी. भार्गव)। साइबर अपराधी लोगों से ठगी करने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पुलिस अधीक्षक दीपक सहारन ने आमजन को सतर्क करते हुए बताया कि इन दिनों “कैप्चा कोड” के जरिए एक नया साइबर स्कैम तेजी से फैल रहा है। उन्होंने कहा कि गूगल या अन्य वेबसाइट्स पर सर्च के दौरान अक्सर कैप्चा वेरिफिकेशन का प्रॉम्प्ट आता है, जिसमें “आई एम नॉट ए रोबोट” पर क्लिक करने का विकल्प होता है। जैसे ही यूजर इस लिंक पर क्लिक करता है, उसे आगे बढ़ने के लिए कुछ स्टेप्स फॉलो करने को कहा जाता है।

एसपी दीपक सहारन के अनुसार, साइबर अपराधी अब असली कैप्चा की जगह नकली कैप्चा कोड का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन फर्जी कैप्चा के माध्यम से यूजर्स के मोबाइल या कंप्यूटर में मेलवेयर (वायरस) भेजा जाता है, जो सिस्टम में पहुंचकर यूजर की निजी और बैंकिंग से जुड़ी जानकारियां चुरा लेता है और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचा देता है। इसके बाद इन जानकारियों का इस्तेमाल कर लोगों के साथ ठगी की जाती है।

उन्होंने बताया कि साइबर ठग नकली कैप्चा कोड बनाकर यूजर्स को अनजाने में मेलवेयर डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। ये फर्जी कैप्चा प्रायः हैक की गई वेबसाइट्स, फर्जी विज्ञापनों या फिशिंग ई-मेल के जरिए भेजे जाते हैं। कई बार साइबर अपराधी किसी लोकप्रिय वेबसाइट की हूबहू नकली वेबसाइट बनाकर ब्राउजर नोटिफिकेशन ऑन करने का तरीका दिखाते हैं, जिस पर क्लिक करते ही मेलवेयर डाउनलोड हो जाता है।

एसपी दीपक सहारन ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से फिशिंग वेबसाइट्स की पहचान और मुश्किल हो गई है। फर्जी साइट्स का डिजाइन, टेक्स्ट और सिक्योरिटी अलर्ट इतने वास्तविक दिखते हैं कि आम यूजर असली और नकली में फर्क नहीं कर पाता। पहले यूजर्स को पासवर्ड रीसेट, डिलीवरी एड्रेस बदलने या किसी जरूरी अपडेट के नाम पर स्पैम ई-मेल भेजी जाती है। फिर ई-मेल में दिए लिंक पर क्लिक करते ही यूजर एक नकली कैप्चा पेज पर पहुंचता है। जैसे ही “आई एम नॉट ए रोबोट” पर क्लिक किया जाता है, यूजर को फिशिंग फॉर्म पर भेज दिया जाता है, जहां पासवर्ड, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारियां मांगी जाती हैं।

एसपी ने कहा कि सावधानी और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। किसी भी व्यक्ति के साथ अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें। यदि साइबर धोखाधड़ी हो जाती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करें, ताकि समय रहते धनराशि को ब्लॉक कराया जा सके।

साइबर अपराधियों से बचने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

किसी भी वेबसाइट के नोटिफिकेशन को बिना जरूरत ऑन न करें।

नकली कैप्चा पर क्लिक करना ही नहीं, बल्कि उसके बाद दिए गए निर्देशों का पालन करना ज्यादा खतरनाक हो सकता है, इसलिए ऐसे निर्देशों को नजरअंदाज करें।

किसी भी वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें; फर्जी वेबसाइट्स में अक्सर स्पेलिंग की गलतियां या संदिग्ध लिंक होते हैं।

अनजान ई-मेल या मैसेज में आए लिंक पर क्लिक करने से पहले भेजने वाले की पहचान और URL की जांच जरूर करें।

अपने सभी अकाउंट्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्रिय रखें।

बैंकिंग, ई-कॉमर्स या अन्य सेवाओं के लिए केवल उनकी आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।

किसी भी संदिग्ध पेज पर ओटीपी, पासवर्ड या निजी जानकारी साझा न करें।

यदि कोई कैप्चा या फॉर्म संदिग्ध लगे, तो उसका स्क्रीनशॉट लेकर तुरंत रिपोर्ट करें।

अपने ब्राउज़र और सुरक्षा सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करते रहें।

 

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