1 नवंबर से बैंक अकाउंट में होंगे बड़े बदलाव: अब चार नॉमिनी जोड़ सकेंगे ग्राहक, तय कर पाएंगे किसे मिलेगा कितना हिस्सा

नई दिल्ली: अगर आपके बैंक अकाउंट, इंश्योरेंस या फिक्स्ड डिपॉजिट में नॉमिनी का नाम जुड़ा है, तो अब आपके लिए एक बड़ी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 नवंबर 2025 से एक नई सुविधा लागू करने जा रहा है, जिसके तहत अकाउंट होल्डर अब एक ही खाते में चार तक नॉमिनी जोड़ सकेंगे। इतना ही नहीं, वे यह भी तय कर पाएंगे कि हर नॉमिनी को अकाउंट में जमा रकम या संपत्ति का कितना हिस्सा मिलेगा।

यह बदलाव ‘बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025’ के तहत किया गया है, जिसे 15 अप्रैल 2025 को अधिसूचित किया गया था। इसका उद्देश्य बैंक खातों और जमा राशि पर विवाद को खत्म करना और पारदर्शिता बढ़ाना है।

🔹 नॉमिनी क्या होता है?

बैंक किसी भी अकाउंट को खोलते समय नॉमिनी जोड़ने को अनिवार्य बनाते हैं, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में अकाउंट होल्डर का पैसा उसके परिवार या कानूनी वारिस तक आसानी से पहुंच सके।
नॉमिनी का नाम बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, डीमैट अकाउंट, बीमा पॉलिसी, लॉकर और प्रॉविडेंट फंड तक में जोड़ना जरूरी होता है।

अगर अकाउंट होल्डर की मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी वह व्यक्ति होता है जो बैंक से पैसा क्लेम कर सकता है। हालांकि, कानूनी रूप से मालिकाना हक तभी मिलता है जब नॉमिनी उस संपत्ति का कानूनी वारिस भी हो।

🔹 किसे बनाया जा सकता है नॉमिनी

नॉमिनी के रूप में आम तौर पर माता-पिता, पति/पत्नी, बेटा या बेटी का नाम जोड़ा जाता है।

कुछ मामलों में परिवार के अन्य सदस्य या किसी करीबी मित्र को भी नॉमिनी बनाया जा सकता है।

नाबालिग नॉमिनी भी मान्य है, लेकिन इसके लिए गार्जियन या ट्रस्टी का नाम देना जरूरी है।

कई लोग किसी संस्था या ट्रस्ट को भी नॉमिनी बनाते हैं, पर बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर है कानूनी उत्तराधिकारी का नाम ही जोड़ा जाए ताकि बाद में कोई विवाद न हो।

🔹 चार नॉमिनी और प्रतिशत तय करने की सुविधा

आरबीआई के नए नियम के मुताबिक, अकाउंट होल्डर चार नॉमिनी तक जोड़ सकेंगे।
हर नॉमिनी को मिलने वाले हिस्से (percentage) को तय किया जा सकेगा — कुल 100% के अनुपात में।
उदाहरण के लिए, अगर किसी ने 4 नॉमिनी बनाए हैं तो वह तय कर सकता है कि

पहले नॉमिनी को 50%,

दूसरे को 25%,

तीसरे को 15% और

चौथे को 10% हिस्सा मिले।

अगर पहला नॉमिनी जीवित नहीं है, तो अगला क्रमवार नॉमिनी क्लेम कर सकेगा।

🔹 क्या नॉमिनी बदला जा सकता है?

हाँ, अकाउंट होल्डर कभी भी नॉमिनी बदल सकता है।
नॉमिनी और वसीयतनामा (Will) में फर्क होता है —

नॉमिनी केवल अकाउंट की राशि क्लेम करने का हकदार होता है।

जबकि वसीयतनामे में किसी व्यक्ति को संपत्ति का कानूनी मालिक घोषित किया जा सकता है।

🔹 क्यों जरूरी है नॉमिनी जोड़ना

भारत में लाखों बैंक खातों में हर साल करोड़ों रुपये बिना क्लेम के रह जाते हैं क्योंकि अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद कोई नॉमिनी नहीं होता।
आरबीआई की नई पहल से ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि –

“नॉमिनी जोड़ना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

1 नवंबर से लागू होने जा रहे इस नए नियम के तहत अब आप अपने खाते के चार नॉमिनी तय कर पाएंगे, प्रत्येक का हिस्सा निर्धारित कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें कभी भी बदल भी सकेंगे। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ाने वाला साबित होगा।

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