बाबा साहब का योगदान अविस्मरणीय: डा सज्जन कुमार

ऐलनाबाद , 12 अप्रैल ( एम पी भार्गव) सीएमआरजे राजकीय महाविधालय मीठी सुरेरा में प्राचार्य डा.सज्जन कुमार की अध्यक्षता तथा राजनीतिक विज्ञान व इतिहास विषय परिषद और एनएसएस के सयोंजन में बाबा साहब डा भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वशिष्ठ अतिथि के रूप में डा. गुरनाम सिंह राजकीय नेशनल महाविद्यालय सिरसा से शिरकत की। प्राचार्य तथा स्टाफ सदस्यों ने मुख्य अतिथि का बुक्के के साथ स्वागत किया गया।तत्पश्चात बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई ।इस अवसर पर प्राचार्य डा. सज्जन कुमार ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर ने आजीवन जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और आर्थिक विषमता के खिलाफ संघर्ष किया। वे भारत के पहले कानून मंत्री भी बने और उन्होंने भारतीय संविधान की रचना में अहम योगदान दिया।डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना हेतु ऐतिहासिक योगदान दिया।

उन्होंने भारत के संविधान में ऐसे प्रावधानों को स्थान दिया, जो हर नागरिक को समान अवसर, न्याय, शिक्षा और सम्मान का अधिकार प्रदान करते हैं। उनके प्रयासों से अस्पृश्यता उन्मूलन, आरक्षण नीति और सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। उन्होंने ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के सिद्धांत को अपनाया और जीवन भर समता और बंधुत्व की भावना को बढ़ावा दिया।डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना हेतु ऐतिहासिक योगदान दिया।

उन्होंने भारत के संविधान में ऐसे प्रावधानों को स्थान दिया, जो हर नागरिक को समान अवसर, न्याय, शिक्षा और सम्मान का अधिकार प्रदान करते हैं। उनके प्रयासों से अस्पृश्यता उन्मूलन, आरक्षण नीति और सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। उन्होंने ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के सिद्धांत को अपनाया और जीवन भर समता और बंधुत्व की भावना को बढ़ावा दिया। प्रो. सावन कुमार ने अपना वक्तव्य पेश करते हुए कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर न केवल संविधान निर्माता थे, बल्कि वे कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले प्रेरणास्रोत भी थे। उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रकाशपुंज है। इसके बाद बाबा साहब की जयंती पर एक पद यात्रा का शुभारंभ किया गया जो गांव पोहड़का तक आयोजित की गई । जिसे प्राचार्य ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर छात्र छात्राओं के साथ महाविद्यालय के शैक्षणिक व ग़ैर शैक्षणिक स्टाफ सदस्य भी मौजूद थे।

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