चित्रकार आनंद नारायण को उनकी पेंटिंग ‘कण-कण में हैं राम’ पर राष्ट्रीय पुरस्कार, बाराबंकी का नाम रोशन
- रिपोर्ट- कपिल सिंह राजपूत
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सिटे जिला बाराबंकी गांव हरख के रहने वाले चित्रकार आनंद नारायण ने देशभर में चित्रकारी में अपनी अलग पहचान बनाई है। आपको बता दूं कि उनकी पेंटिंग ‘कण-कण में हैं राम’ को ललित कला अकादमी और संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में चुना गया। इस कृति के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया
राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में आनंद नारायण को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया इस वर्ष उत्तर प्रदेश से केवल आनंद की पेंटिंग का चयन हुआ, जो राम नगरी अयोध्या की आध्यात्मिकता और भव्यता की झलक को दर्शाती यह पेंटिंग है।
आनंद नारायण की पेंटिंग में राम नगरी अयोध्या की संस्कृति और आध्यात्मिक धरोहर को खूबसूरती से
दर्शाने का काम किया है चित्रकार आनंद नारायण ने। इसमें सरयू आरती, सीता रसोई, कनक भवन, हनुमानगढ़ी, राम मंदिर और अंगद टीला जैसे प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया।
इस प्रदर्शनी में कुल 5922 आवेदनों में से 283 कृतियों का चयन हुआ, जिनमें आनंद की पेंटिंग भी शामिल रही। कलर्स प्रेमी आनंद नारायण लखनऊ कला महाविद्यालय से बीएफए और जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से एमएफए की पढ़ाई की।
50 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी रही।
राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ से भी कई बार सम्मानित हो चुके आनंद नारायण “आध्यात्मिक धरोहर बनारस के घाट” और “अनछुई प्रकृति” जैसी पेंटिंग श्रृंखलाओं से भी पहचान।
कवि के रूप में भी जाने जाते हैं आनंद नारायण अपनी कविताओ, रचनाओं के माध्यम से जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान उन्होंने इस पेंटिंग की शुरुआत अपनी कविता की पंक्तियों से की थी—
“जिससे हो हर रोज दिवाली, ऐसा दिया दिला दो राम।
दिया तले अंधेरे को भी, अबकी बार जला दो राम।”
आनंद नारायण बताते हैं कि
कला केवल अभिव्यक्ति नहीं बल्कि समाज और संस्कृति को जागृत करने का साधन है। उनको मिला यह सम्मान पूरे देश उत्तर प्रदेश बाराबंकी के लिए गौरव की बात है।
चित्रकार आनंद नारायण की पेंटिंग ‘कण-कण में हैं राम’ को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार न केवल उनकी कला साधना का सम्मान है, बल्कि अयोध्या और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक धरोहर को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाता है।
