1977 चुनाव का दिलचस्प किस्सा: जब गांव की महिलाओं ने बंसी लाल की पत्नी से कहा— “वोट तो चंद्रावती को देंगे, वो हमारे बटेऊ लगते हैं”

गुस्ताखी माफ हरियाणा –पवन कुमार बंसल 

बहन जी आपको ही देंगे – यो बंसी के म्हारा बटेऊ लागे।

किस्सा 1977 के लोकसभा चुनाव का है। भिवानी लोकसभा सीट से बंसी लाल का मुकाबला जनता पार्टी की चंद्रावती से था। उस समय पूरे देश में, खासतौर पर उत्तरी भारत में, इमरजेंसी की ज्यादतियों को लेकर कांग्रेस के खिलाफ काफी रोष था। हरियाणा में अफसरों ने कुंवारों की भी नसबंदी कर दी थी। तब नारा लगा था – नसबंदी के तीन दलाल: इंदिरा – संजय – बंसीलाल।

आमतौर पर बंसी लाल परिवार की महिलाएं तब चुनाव प्रचार में नहीं जाती थीं। किरण चौधरी तो बाद में आई थीं। मैडम बंसीलाल भी मजबूरी में वोट मांगने निकलीं। वे एक सीधी-साधी महिला थीं। पति के ओहदे का भी कोई घमंड नहीं था।

हलके के एक गांव में वोट मांगने गईं। औरतों ने समझा कि ये चंद्रावती हैं। कहने लगीं – “बहन जी, वोट थाणे ही दे देंगे। यो बंसी के म्हारा बटेऊ लागे।” मतलब – क्या, हमारा दामाद है। दामाद की तो बात माननी पड़ती है।

अब मैडम बंसीलाल हक्की-बक्की रह गईं। कहने लगीं – “मैं बंसी लाल की घरवाली हूं।”
अब वे औरतें कहने लगीं – “बेबे, वो तो ठीक है, पर इस बार बंसी ने वोट नहीं देवे।”

चंद्रावती ने पिछले दिनों अपने संस्मरण लिखे हैं। काफी बुजुर्ग हो गई हैं। मेरे फेसबुक दोस्त जून साहिब से उनका पारिवारिक रिश्ता है।

मै के तेरी सासू हूं।

रणधीर सिंह बहियापुर भी एक बार चुनाव में वोट मांग रहे थे। एक बुजुर्ग औरत से कहने लगे – “मेरा सर प्लोस दे।” भाई, सर प्लोस दिया तो वोट तो अपने आप मिल जाएगी।

वो बुजुर्ग औरत बोली – “सर क्यों प्लोस दूं, मै के तेरी सासू हूं?”

जब दामाद ससुराल जाता है तो सालियां तो मजाक करती ही हैं, लेकिन सासू सर प्लोस कर आशीर्वाद देती है।

 

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