गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा — पवन कुमार बंसल
देश में “दूध-दही का खाना” कहे जाने वाले हरियाणा को न केवल अपने समृद्ध खानपान, बल्कि अपने नेताओं की राजनीतिक नटखटता और हाज़िरजवाबी के लिए भी जाना जाता है। यहां के राजनीतिक “लाल” — बंसीलाल, देवीलाल, भजनलाल और अब मनोहरलाल — जितने राजनीति में प्रभावशाली रहे हैं, उतने ही अपने चुटीले स्वभाव और तंज भरे हास्य के लिए भी चर्चित रहे हैं।
हरियाणा की राजनीति पर भ्रष्टाचार, जातिवाद, अवसरवाद और भाई-भतीजावाद के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि यहां के लोग और नेता अपनी हंसी-मज़ाक की प्रवृत्ति से माहौल को हल्का बनाने में माहिर हैं। वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय प्रभाष जोशी ने एक बार टिप्पणी की थी — “आम तौर पर लोग दूसरों पर हँसते हैं, लेकिन हरियाणवी अपने ऊपर भी हँसने की दुर्लभ क्षमता रखते हैं।”
बंसीलाल की हंसी में छिपा राजनीतिक संदेश
मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल में बंसीलाल की सरकार बहुत कम बहुमत पर चल रही थी। तब ‘दल-बदल कानून’ का भय नहीं था और विरोधी दल उनके खिलाफ साजिशें रचते रहते थे। एक दिन बंसीलाल ने व्यंग्य करते हुए कहा —
“मैं तोषाम के रेतीले इलाके का रहने वाला हूँ। बचपन में ऊँट की पूँछ पकड़कर मीलों चलता था। जब मैं ऊँट की पूँछ नहीं छोड़ता था तो ये तो कुर्सी है!”
यह बात हंसी में कही गई थी, पर इसमें बंसीलाल की जुझारू राजनीतिक शैली झलकती थी।
देवी लाल की हाजिरजवाबी का जवाब नहीं
1986 में राजीव–लोंगोवाल समझौते के खिलाफ देवी लाल ने “न्याय युद्ध आंदोलन” शुरू किया था। नारवाणा में उनकी सभा पर प्रशासन ने धारा 144 लगा दी थी। जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि सभा कैसे करेंगे, तो देवी लाल मुस्कराते हुए बोले —
“तूने देखी है क्या धारा 144? मैं तो दिल्ली से आया हूँ, रास्ते में कहीं नहीं दिखी!”
देवी लाल ने वाकई धारा 144 की परवाह किए बिना भव्य सभा को संबोधित किया, और उस समय वे हरियाणा के “बेताज बादशाह” कहलाते थे।
‘डी’ के बिना ‘एबीसी’ अधूरा — देवी लाल का जवाब
1989 में जब देवी लाल मुख्यमंत्री थे, उन्होंने प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और विपक्षी दलों को एकजुट कर जनता दल का गठन कराया था। डॉ. जी. प्रसन्न कुमार (सेवानिवृत्त आईएएस) ने एक दिलचस्प प्रसंग साझा किया —
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार ने पूछा, “जनता दल की एबीसीडी में — अजीत सिंह, बहुगुणा, चंद्रशेखर पहले आते हैं, और आप देवी लाल आखिर में हैं।”
देवी लाल ने तुरंत अंग्रेजी में जवाब दिया —
“Without D, A, B, C is zero.”
(‘डी’ यानी देवी लाल के बिना एबीसी कुछ नहीं)।
हरियाणा के नेताओं की यही खासियत रही है कि वे राजनीति की गंभीरता के बीच भी हंसी और व्यंग्य का स्थान बनाए रखते हैं। यही वजह है कि हरियाणा केवल दूध-दही का देश नहीं, बल्कि ‘हंसी और हाजिरजवाबी की धरती’ के रूप में भी जाना जाता है।
