ईरान-अमेरिका तनाव के बीच हमले की आशंका बरकरार, जानिए अगर कार्रवाई हुई तो अमेरिका के निशाने पर क्या होगा
तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच गुरुवार को कुछ नरमी के संकेत जरूर मिले, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना फिलहाल टाल दी है, तनाव में कमी की उम्मीद जगी। वहीं तेहरान के एक मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो वह हवाई हमले फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थित एयरबेस की एक श्रृंखला से या उससे भी दूर से कर सकता है, ताकि ईरान अपनी मिसाइलों से उन्हें सीधे निशाना न बना सके। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाए बिना ईरानी सरकार और सैन्य ढांचे को लक्ष्य बनाए।
नेताओं के ठिकाने और IRGC से जुड़े ठोस लक्ष्य
ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ एशिया इंस्टीट्यूट के विजिटिंग फेलो पीटर लेटन का कहना है कि संभावित हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने से बचना बेहद जरूरी होगा। उनके अनुसार, शासन से जुड़े नेताओं के घरों और दफ्तरों पर हमला एक कड़ा संदेश दे सकता है। इसके अलावा ईरानी नेतृत्व और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े व्यावसायिक ठिकाने और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े केंद्र भी निशाने पर हो सकते हैं, जो शासन के लिए आर्थिक रूप से अहम हैं।
अमेरिका किन हथियारों का कर सकता है इस्तेमाल
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, पिछले वर्ष परमाणु ठिकानों पर हमलों में बी-2 बॉम्बर की अहम भूमिका रही थी, लेकिन मौजूदा हालात में अमेरिका अन्य हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकता है। क्षेत्रीय IRGC मुख्यालयों और सैन्य ठिकानों पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से हमला किया जा सकता है। ये मिसाइलें अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बियों और सतह पर तैनात जहाजों से ईरानी तटों से काफी दूर से दागी जा सकती हैं।
इसके अलावा जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल (JASSM) भी एक विकल्प मानी जा रही है। लगभग 453 किलो वॉरहेड ले जाने वाली और करीब 1,000 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली इस मिसाइल को अमेरिकी वायुसेना के एफ-15, एफ-16, एफ-35 जैसे फाइटर जेट्स और बी-1, बी-2, बी-52 बॉम्बर्स से दागा जा सकता है।
ड्रोन का भी हो सकता है इस्तेमाल
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिका ड्रोन का सहारा ले सकता है। हालांकि चालक दल वाले विमानों से कम दूरी के हथियार या फ्री-फॉल बम गिराने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि इसे अत्यधिक जोखिम भरा समझा जाता है।
कुल मिलाकर, भले ही कूटनीतिक स्तर पर नरमी के संकेत दिख रहे हों, लेकिन ईरान-अमेरिका तनाव के बीच सैन्य कार्रवाई की आशंका अब भी बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजरें आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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