दिल्ली में आज दोपहर 3 बजे बजेगा एयर रेड सायरन: नागरिकों से घबराने की आवश्यकता नहीं

सायरन परीक्षण का उद्देश्य और समय

नई दिल्ली: दिल्ली के केंद्रीय क्षेत्र में आज, शुक्रवार, 9 मई 2025 को दोपहर 3 बजे एयर रेड सायरन का परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण लगभग 15 से 20 मिनट तक चलेगा। नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अभ्यास है और लोगों से अनुरोध किया है कि वे इस दौरान शांत रहें और घबराएं नहीं।

पृष्ठभूमि: ऑपरेशन अभ्‍यास और राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारी
यह परीक्षण ‘ऑपरेशन अभ्‍यास’ के तहत किया जा रहा है, जो 7 मई 2025 को देशभर में आयोजित एक व्यापक नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल का हिस्सा है। इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित हवाई हमलों, ब्लैकआउट और आपातकालीन निकासी जैसी स्थितियों में नागरिकों और प्रशासन की तैयारी का मूल्यांकन करना है। यह पहल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद की गई है, जिसमें 26 नागरिकों की मृत्यु हुई थी।

दिल्ली में मॉक ड्रिल की तैयारी
दिल्ली में यह अभ्यास 55 स्थानों पर आयोजित किया गया, जिसमें सभी 11 जिलों को शामिल किया गया। इन स्थानों पर 60 एयर रेड सायरन लगाए गए थे, जो दोपहर 4 बजे बजे। इस अभ्यास में हजारों नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों, पुलिस अधिकारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया दलों ने भाग लिया।

चंडीगढ़ में सुबह 9:30 बजे बजा सायरन
शुक्रवार सुबह लगभग 9:30 बजे चंडीगढ़ में एयर रेड सायरन बजाया गया था। यह चेतावनी वायुसेना स्टेशन से एक संभावित हवाई हमले की सूचना के बाद जारी की गई थी।

डिप्टी कमिश्नर, चंडीगढ़ द्वारा जारी संदेश में लोगों को घर के अंदर रहने और बालकनी से दूर रहने की सलाह दी गई थी।

10:16 बजे समाप्त हुआ अलर्ट
बाद में सुबह 10:16 बजे चंडीगढ़ प्रशासन ने एक पोस्ट जारी कर बताया कि फिलहाल के लिए खतरे का अलर्ट समाप्त कर दिया गया है।

नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश
शांत रहें: सायरन बजने पर घबराएं नहीं; यह केवल एक अभ्यास है।

घर के अंदर रहें: सायरन बजने के दौरान घर के अंदर रहें और खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें।

सूचनाओं का पालन करें: सरकारी निर्देशों और मीडिया के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं का पालन करें।

आपातकालीन किट तैयार रखें: टॉर्च, प्राथमिक चिकित्सा किट, पानी और आवश्यक दवाएं तैयार रखें।

दिल्ली और अन्य शहरों में आयोजित यह मॉक ड्रिल नागरिकों और प्रशासन की आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अभ्यास के माध्यम से संभावित खतरों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारी और समन्वय का मूल्यांकन किया जा रहा है।

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