अग्निपथ योजना 2026: पहला बैच होगा बाहर, 75% अग्निवीरों के भविष्य पर बहस तेज

नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों का पहला बैच 2026 के अंत से सेवा अवधि पूरी कर बाहर आने लगेगा। इसके साथ ही 75 प्रतिशत अग्निवीरों के भविष्य और रोजगार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं 2026-27 में स्थायी भर्ती के प्रतिशत को बढ़ाने पर भी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

क्या है अग्निपथ योजना?

भारत सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ भर्ती योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिक, नाविक और वायुसैनिक जैसे पदों पर युवाओं को चार साल की अल्पकालिक सेवा के लिए ‘अग्निवीर’ के रूप में भर्ती किया जाता है। नियम के अनुसार, सेवा पूरी होने के बाद केवल 25% अग्निवीरों को योग्यता और आवश्यकता के आधार पर स्थायी सेवा (अतिरिक्त 15 वर्ष) का अवसर मिलता है, जबकि 75% को सेवा मुक्त कर दिया जाता है।

कब बाहर आएगा पहला बैच?

2026 को अग्निपथ योजना की पहली बड़ी परीक्षा का वर्ष माना जा रहा है।

नवंबर 2026 में नौसेना के पहले बैच के लगभग 2600 अग्निवीर चार साल की सेवा पूरी करेंगे।

इसके बाद 2027 की शुरुआत में थल सेना और वायुसेना के पहले बैच बाहर आएंगे।

थल सेना के पहले बैच में करीब 46,000 युवा भर्ती हुए थे।

तीनों सेनाओं में पहले चरण में हजारों अग्निवीर शामिल हुए थे, जिनमें से 75% को बाहर होना होगा।

75% अग्निवीरों को रोजगार कैसे मिलेगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है। सरकार का दावा है कि पूर्व-अग्निवीरों के लिए पर्याप्त अवसर सुनिश्चित किए गए हैं।

सरकारी दावे:

सेवा समाप्ति पर लगभग 11.71 लाख रुपये का टैक्स-फ्री सेवा निधि पैकेज।

स्किल सर्टिफिकेट और कॉलेज क्रेडिट की सुविधा।

CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) और राज्य पुलिस में प्राथमिकता।

गृह मंत्रालय ने CAPF के ग्रुप-सी पदों (जैसे कांस्टेबल) में पूर्व-अग्निवीरों के लिए आरक्षण 10% से बढ़ाकर 50% कर दिया है।

हरियाणा सहित कई राज्यों में पुलिस भर्ती में अलग कोटा (जैसे 20%) तय किया गया है।

शारीरिक दक्षता परीक्षा में भी छूट दी जा रही है।

स्थायी भर्ती प्रतिशत बढ़ाने की मांग

योजना की शुरुआत से ही 25% स्थायी भर्ती को लेकर सवाल उठते रहे हैं। तीनों सेनाओं ने सुझाव दिया था कि इसे 40-50% तक बढ़ाया जाए, कुछ मामलों में 70% तक की भी सिफारिश की गई।

2025 की आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में 25% से बढ़ाकर 75% तक करने का प्रस्ताव चर्चा में आया था, ताकि प्रशिक्षित जवानों का बेहतर उपयोग हो सके और सेना में लगभग 1.8 लाख की कमी को पूरा किया जा सके।

कुछ रिपोर्ट्स में सेवा अवधि 4 साल से बढ़ाकर 6-8 साल करने की संभावना भी जताई गई, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है।

आगे क्या?

सरकार का कहना है कि योजना सफल रही है और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर सिविल सेक्टर में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

हालांकि, जैसे-जैसे पहला बैच बाहर आएगा, 2026-27 में स्थायी प्रतिशत बढ़ाने और 75% अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। CAPF, राज्य पुलिस और निजी क्षेत्र में अवसर मिलने की उम्मीद है, लेकिन लाखों युवाओं की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी रहेगी।

 

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