आडवाणी को भारत रत्न: जब आडवाणी ने एमडीयू रोहतक में मानद डॉक्टरेट लेने से इनकार कर दिया था 

गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

आडवाणी को राम रथ यात्रा के लिए जाना जाता है। उनकी महानता का एक किस्सा याद आया। आडवाणी गृह मंत्री थे और एमडीयू रोहतक के वाइस चांसलर जनाब कौशिक साहिब ने उन्हें यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया था। यह लेखक तब रोहतक में जनसत्ता अख़बार का रिपोर्टर था और उस समारोह में मौजूद था।

अपनी स्पीच में आडवाणी साहिब ने रहस्योद्घाटन किया कि वाइस चांसलर कौशिक ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि देने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि यह सम्मान मुझे नहीं, बल्कि मेरे पद को दिया जा रहा है। जब मैं मंत्री नहीं रहूंगा, तब देना—तो ले लूंगा। वाकई वे महान थे।

दुमछला—यह डिग्री तो पद को मिलती है, यानी मुंह देख टीका होता है। अब इसी यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे सज्जन को मीडिया की महान हस्ती की डॉक्टरेट की मानद उपाधि दे दी, जबकि उस सज्जन का मीडिया की हस्ती होना तो दूर, वे एवरेज भी नहीं थे, लेकिन वे सीएम के मुंह लगते थे।

अब अगर मुझ पर यह आरोप न लगे कि मैं अपना दुखड़ा रो रहा हूं, तो बता दूं कि अपन को मानद उपाधि तो दूर की बात, यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग में लेक्चर के लिए भी नहीं बुलाती, कि कहीं सूबे के मुखिया नाराज़ न हो जाएं। जबकि अपन हरियाणा में पांच दशक से खोजी पत्रकारिता कर रहे हैं और खोजी पत्रकारिता क्यों और कैसे, सहित हरियाणा की राजनीति, संस्कृति और गवर्नेंस पर किताब लिख चुके हैं, जिनकी प्रशंसा कपिल देव, खुशवंत सिंह, कुलदीप नैयर, प्रभाष जोशी और न्यायमूर्ति पी. बी. सावंत ने भी की है।

बकौल शायर—
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी,
यूँ ही तो कोई बेवफ़ा नहीं होता।

अपन के लिए तो पाठकों का प्यार ही सबसे बड़ी डिग्री है। हां, अगर मैं अपनी आत्मा बेचकर कलम से समझौता कर लूं, तो यह यूनिवर्सिटी तो क्या, सूबे की हर यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर अपन को मानद उपाधि देने के लिए पलक बिछा देगा।

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