रक्षा क्षेत्र में अडानी ग्रुप का बड़ा दांव, ऑटोनॉमस सिस्टम और एडवांस्ड हथियारों पर 1.8 लाख करोड़ का निवेश
नई दिल्ली।भारत में रक्षा निर्माण (Defence Manufacturing) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में अडानी ग्रुप बड़ा कदम उठाने जा रहा है। निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी अडानी ग्रुप अगले वर्ष रक्षा क्षेत्र में करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही है। इससे भविष्य में भारतीय सेनाओं को हथियार, गोला-बारूद और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों की किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी।
अडानी ग्रुप पहले से ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में सक्रिय है और अब कंपनी मानवरहित (Unmanned) और ऑटोनॉमस सिस्टम, एडवांस्ड गाइडेड हथियार, सेंसर व इलेक्ट्रॉनिक्स, AI-इनेबल्ड मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) तथा ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर देने जा रही है। वर्ष 2026 तक इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा।
अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस आज भारत की सबसे बड़ी एकीकृत निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनी के रूप में उभर चुकी है। कंपनी मानवरित हवाई ड्रोन, मानव रहित समुद्री ड्रोन और विभिन्न प्रकार के छोटे हथियारों का निर्माण कर रही है। वर्ष 2025 में अडानी डिफेंस के ‘दृष्टि-10 यूएवी’ को भारतीय नौसेना और थल सेना में लंबी अवधि के खुफिया, निगरानी और टोही अभियानों के लिए शामिल किया गया था।
अडानी ग्रुप की हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास इजरायली कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के साथ संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) में अनमैन्ड एरियल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी पहले से संचालित है। इसके अलावा तेलंगाना में मिसाइल और काउंटर-ड्रोन सिस्टम निर्माण की यूनिट भी स्थापित की जा रही है।
रक्षा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार की दिशा में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने देश की पहली AI-सक्षम असॉल्ट राइफल ‘अराद’ का भी निर्माण किया है। कानपुर स्थित स्मॉल आर्म्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में तैयार की गई यह राइफल इजरायली डिज़ाइन पर आधारित है, जिसे भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप उन्नत बनाया गया है। ‘अराद’ का AI-संचालित फायर कंट्रोल सिस्टम इसे देश की सबसे आधुनिक असॉल्ट राइफलों में शामिल करता है।
इसके अलावा अडानी डिफेंस ने काउंटर-ड्रोन सिस्टम और अग्निका लोइटरिंग म्यूनिशंस जैसे अत्याधुनिक हथियार भी विकसित किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी ग्रुप के इस बड़े निवेश से भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत होगा तथा ‘मेक इन इंडिया’ को नई गति मिलेगी।
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