ऐलनाबाद, 3 जनवरी (एम पी भार्गव ): वीरांगना कन्या संस्कार केंद्र द्वारा आयोजित आध्यात्मिक महोत्सव के सातवें दिन सिरसा शहर में श्रद्धा और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के अंतिम चरण में जहाँ एक ओर वेदमंत्रों के साथ ‘गायत्री सामाजिक समरसता महायज्ञ’ संपन्न हुआ, वहीं दूसरी ओर भव्य शोभा यात्रा ने नगर को भक्तिमय कर दिया।
सामाजिक समरसता का संकल्प
सप्तम दिवस की शुरुआत गायत्री महायज्ञ के साथ हुई। इस यज्ञ की विशेषता ‘सामाजिक समरसता’ रही, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एक साथ आहुति डालकर ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने और राष्ट्र की मजबूती का संकल्प लिया। केंद्र के संचालकों ने बताया कि संस्कार केंद्र का मूल उद्देश्य कन्याओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में एकता स्थापित करना है।
दीदी श्री जी की अमृतमयी वाणी
यज्ञ के उपरांत भक्तों को दीदी श्री जी के मुखारविंद से सप्तम दिवस की कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दीदी जी ने अपने प्रवचन में कहा कि “संस्कार ही मनुष्य की असली पूंजी है।” उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि सनातन धर्म हमें सबको साथ लेकर चलना सिखाता है और आज के युग में राष्ट्र की उन्नति के लिए समरस समाज का होना अनिवार्य है।
नगर में भव्य शोभा यात्रा
कथा के पश्चात नगर में एक विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों और धार्मिक भजनों के साथ निकली इस यात्रा में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। यात्रा के दो मुख्य उद्देश्य रहे:
सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार
सामाजिक समरसता का संदेश
यात्रा मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। हाथों में धर्म ध्वजा लिए युवा और महिलाएं ‘जय श्री राम’ और ‘सनातन धर्म की जय’ के जयघोष कर रहे थे।
रात्रि में हरि चर्चा और संकीर्तन
दिनभर के कार्यक्रमों के बाद, रात्रि में वैष्णव परिवार के निवास पर विशेष ‘हरि चर्चा’ एवं संकीर्तन का आयोजन किया गया।
