आज के दौर में जहां भागदौड़ भरी जिंदगी इंसान को अपनों से दूर कर रही है, वहीं “मां” का रिश्ता आज भी सबसे पवित्र और अनमोल बना हुआ है। खासकर ईद जैसे पावन अवसर पर मां की अहमियत और भी बढ़ जाती है, जब उसकी दुआएं और ममता घर को सुकून और खुशियों से भर देती हैं।
ईद का त्योहार सिर्फ खुशियां मनाने का अवसर नहीं, बल्कि यह भाईचारे, एकता और इंसानियत का संदेश भी देता है। यही मूल्य किसी भी मुल्क की असली ताकत होते हैं।
रात की खामोशी में भी मां की याद दिल के हर कोने में गूंजती है। उसकी ममता ऐसी छांव देती है, जो हर दर्द को हल्का कर देती है। एक भावुक पंक्ति इस एहसास को बयां करती है—
“रात की खामोशी में आज भी तेरी आवाज आती है मां,
आंखें बंद करूं तो तेरी ममता की छांव सताती है मां।”
यह सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उन लोगों की सच्चाई है जो अपनी मां से दूर हैं या उन्हें खो चुके हैं। ऐसे लोगों के लिए ईद की खुशियां भी अधूरी लगती हैं।
वरिष्ठ पत्रकार हामिद अली का राजपूत ने कहा कि मां एक ऐसी अनमोल दौलत है, जिसकी कीमत कभी नहीं चुकाई जा सकती। उन्होंने बताया कि मां का प्यार निस्वार्थ होता है और उसकी दुआएं हर मुश्किल को आसान बना देती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ईद का असली मतलब केवल नए कपड़े पहनना या पकवान बनाना नहीं है, बल्कि माता-पिता की सेवा करना, उनकी खुशियों का ख्याल रखना और उनकी दुआएं लेना है। मां की दुआ के बिना कोई भी खुशी अधूरी है।
साथ ही उन्होंने समाज में भाईचारे की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि ईद हमें आपसी प्रेम, एकता और मेलजोल का संदेश देती है। जब समाज में भाईचारा मजबूत होता है, तभी देश तरक्की करता है।
समाज में मां का स्थान केवल एक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि वह त्याग, समर्पण और बिना शर्त प्रेम की प्रतीक है। ईद के मौके पर मां के हाथों से बनी सेवइयों की मिठास और उसके चेहरे की मुस्कान ही सच्ची खुशी का एहसास कराती है।
निष्कर्ष:
मां का प्यार दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है। ईद की असली रौनक मां की दुआओं से है और भाईचारा ही किसी भी मुल्क की सबसे बड़ी ताकत है।
