लखीसराय में पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण को लेकर उच्चस्तरीय बैठक, सात संरक्षित स्थलों के विकास की रूपरेखा तैयार
लखीसराय(सरफराज आलम)जिला प्रशासन ने जिले के सात संरक्षित पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण और विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। डीएम मिथिलेश मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पुरातत्वविदों, इतिहासकारों और विशेषज्ञों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव प्राप्त किए गए।बैठक में डीएम ने स्पष्ट किया कि लखीसराय की ऐतिहासिक धरोहरें जिले की सांस्कृतिक पहचान हैं और इनके संरक्षण में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सात संरक्षित स्थलों की वर्तमान स्थिति, भावी संभावनाओं और आवश्यक सुधारों का 2–3 पृष्ठों का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध कराएंअधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि संरक्षण तकनीकों, प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता बढ़ाने के प्रभावी उपायों को रिपोर्ट में शामिल किया जाए।
डीएम ने कहा कि पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन विकास से जिले में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही उन्होंने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि धरोहरों की रक्षा को जिम्मेदारी की तरह निभाएं और किसी भी तरह की क्षति पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहें।
बैठक में अपर समाहर्ता नीरज कुमार, वरीय उपसमाहर्ता-सह-नोडल पदाधिकारी (पर्यटन) शशि कुमार, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी मृणाल रंजन, नजारत उपसमाहर्ता प्राची कुमारी, जिला योजना पदाधिकारी आशुतोष कुमार और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार सहित कई विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
