ऐलनाबाद,13 अप्रैल (एम पी भार्गव ): वैसाखी के पावन अवसर पर 12 अप्रैल, रविवार को श्री सुखमनी साहिब सोसाइटी, ऐलनाबाद द्वारा एक भव्य विशेष कीर्तन दरबार सजाया गया। इस अवसर पर भाई गुरदयाल सिंह (रागी जथा), ऐलनाबाद वाले, श्री गंगानगर से पधारकर अपनी मधुर वाणी से गुरुबाणी कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
कार्यक्रम लगभग तीन घंटे तक चला, जिसमें संगत ने श्रद्धा भाव से कीर्तन का आनंद लिया और गुरु का नाम सिमरन किया। वैसाखी का यह पावन पर्व ऐलनाबाद में बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया।
इस मौके पर बड़ी संख्या में गुरु की संगत, सामाजिक संस्थाओं के सदस्य व अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने हाजिरी लगाकर अपने जीवन को सफल बनाया। जिनमें प्रमुख रूप से अमीरचंद मेहता (भाजपा), रवि लड्डा , मक्खन सिंह हंजरा, हेमराज सपरा (योग गुरु प्रधान), नरेंद्र कुमार गिदड़ा , डॉ. बेनीवाल, सुरजीत सिंह, सतनाम सिंह, जसवीर सिंह खालसा, गुरप्रीत सिंह खालसा, गुरनाम सिंह, इंद्रजीत सिंह अरोड़ा, सतनाम सिंह अरोड़ा, हरभजन सिंह, जीत सिंह खालसा, दलजीत सिंह, सोनू मक्कड़, अमनदीप सिंह, काला सिंह, जसवंत सिंह बेनीवाल.प्रधान, रामदेव भंडारा समिति, एमपी तंवर सहित श्री सुखमनी सेवा सोसाइटी के सभी सदस्य व श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
करीब 37 वर्ष पुरानी इस संस्था को संगत का भरपूर प्यार मिला। संस्था निष्काम भाव से घर-घर जाकर श्री सुखमनी साहिब के पाठ, भजन-कीर्तन करती है तथा सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर सेवा देती है। साथ ही फ्री बर्तन सेवा भी निरंतर चलाई जा रही है।
इस दौरान अमीरचंद मेहता ने सभी संगत को वैसाखी पर्व की हार्दिक बधाई दी और अपने संबोधन में कहा कि लगातार “सुखमनी साहिब का पाठ” करने से जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि तलवाड़ा में भी इस प्रकार का पाठ करवाया गया था, जहाँ पूरे आयोजन के दौरान मौसम ने भी साथ दिया और सब कुछ सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने संगत को ऐसे धार्मिक कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान अमीरचंद मेहता , रवि लड्डा , इंद्रजीत सिंह अरोड़ा, सतनाम सिंह अरोड़ा और मक्खन सिंह हंजरा को मोहन सिंह रखड़ा, काला सिंह, अमनदीप सिंह व दलजीत सिंह द्वारा सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।
वहीं भाई गुरदयाल सिंह व उनके सहायक भाई मंजीत सिंह तथा तबला वादक भाई बाबू सिंह सहित समस्त रागी जत्थे को मक्खन सिंह हंजरा द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में सिरोपा देकर सम्मानित किया गया।
संगत ने इस पावन आयोजन की सराहना की और गुरु की वाणी का रसपान कर अपने जीवन को धन्य बनाया।
