ऐलनाबाद ,सिरसा ( एम पी भार्गव) केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय स्टेशन सिरसा द्वारा खंड नाथूसरी चौपटा के गांव राजपुरा साहनी में गुलाबी सुंडी के गैर ऋतु में जीवित रहने के स्रोतों, विशेषकर लकड़ियों की सार-संभाल के विषय पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रासी सीड्स एवं केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान के संयुक्त प्रोजेक्ट 2025-26 के अंतर्गत आयोजित किया गया।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय स्टेशन सिरसा के प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. ऋषि कुमार ने नरमा-कपास की कटाई के बाद गुलाबी सुंडी के गैर ऋतु में जीवित रहने के स्रोतों के नियंत्रण हेतु किसानों को कई उपयोगी सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अंतिम चुगाई के बाद खेत में भेड़-बकरियों को चरने दें, ताकि खेत में बचे हुए पौधे नष्ट हो जाएं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि संभव हो तो रोटावेटर की सहायता से लकड़ियों को जमीन में मिला दें, ताकि सुंडी के लार्वा खत्म हो जाएं।
डा. ऋषि ने किसानों को बताया कि लकड़ियों को ईंधन के रूप में गांव में भंडारित करें, न कि खेत में छोड़ें। भंडारण करते समय लकड़ियों को लंबवत खड़ा करें, बड़े ढेर के रूप में न रखें। इसके अलावा लकड़ियों को मच्छरदानी या प्लास्टिक शीट से ढक कर रखना भी उपयोगी है। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च महीने में भंडारित लकड़ियों को झाड़ना आवश्यक है ताकि उनमें छिपी सुंडियां और अधखुले टिंडे अलग किए जा सकें। खराब या अधखुले टिंडे गहरे गड्ढे में दबा देने चाहिएं, ताकि उनका पुनः संक्रमण न हो।
कार्यक्रम में तकनीकी अधिकारी सतपाल सिंह ने किसानों को फेरोमोन ट्रैप की सहायता से गुलाबी सुंडी की निगरानी करने की जानकारी दी ।
