विद्यालयों के मर्जर और बंदी के खिलाफ शिक्षकों और प्रधानों का प्रतिनिधिमंडल MLC जयपाल सिंह व्यस्त से मिला

बेसिक शिक्षा विभाग की मर्जर प्रक्रिया को बताया जनविरोधी, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

रामपुर:   उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चल रही विद्यालय पेयरिंग/मर्जर प्रक्रिया के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों, ग्राम प्रधानों और विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों ने विधान परिषद सदस्य जयपाल सिंह व्यस्त से मुरादाबाद स्थित उनके आवास पर मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में अवगत कराया गया कि प्रदेश सरकार द्वारा 150 से कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों और 100 से कम छात्र संख्या वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने या उन्हें प्रधानाध्यापक विहीन घोषित करने की प्रक्रिया जारी है, जिससे न केवल गरीब बच्चों की शिक्षा बाधित होगी, बल्कि बीटीसी/डीएलएड कर रहे युवाओं के रोजगार के अवसर भी समाप्त हो जाएंगे।

शिक्षकों ने यह भी बताया कि इस फैसले के चलते हजारों प्रधानाध्यापकों को सरप्लस घोषित किया जा रहा है, जिससे पदोन्नति के अवसर खत्म हो रहे हैं। साथ ही हजारों रसोइयों की सेवाएं भी समाप्त हो जाएंगी, जिससे सामाजिक असंतोष बढ़ेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा प्रधानाध्यापकों, ग्राम प्रधानों और विद्यालय प्रबंध समितियों पर दबाव डालकर विद्यालय बंद करने के प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 30 जून 2025 को प्रदेश के 822 ब्लॉकों में शिक्षक संघ, अभिभावकों व ग्राम प्रधानों की बैठकें हुईं, जिनमें सरकार के इस निर्णय के प्रति भारी रोष और विरोध दर्ज किया गया और एक स्वर में इसका प्रस्ताव पारित कर विरोध किया गया।

प्रतिनिधियों ने MLC जयपाल सिंह व्यस्त से निवेदन किया कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस फैसले को निरस्त करने की संस्तुति करें।

ज्ञापन देने वालों में चरन सिंह (जिला मंत्री), नरेंद्र सैनी (ब्लॉक अध्यक्ष), राजीव सिंह, राकेश सिंह, अजय कुमार, ऋषिपाल (ग्राम प्रधानगण), गौरवदीप (जिला संगठन मंत्री), रामकिशोर, राजेंद्र सिंह, मनोज कुमार, अनुसेंद्र सिंह चौहान सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

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