होली से पहले शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा, मानदेय 10 हजार से बढ़कर 18 हजार रुपये

  • रिपोर्ट: कपिल सिंह

सिद्धार्थनगर। होली से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार की बड़ी घोषणा से जिले के शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री द्वारा मानदेय बढ़ाने के फैसले का सीधा लाभ सिद्धार्थनगर के लगभग 2602 शिक्षामित्रों को मिलेगा। अप्रैल से शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये के स्थान पर 18 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा, जबकि अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।

सीमावर्ती और पिछड़े जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर में बड़ी संख्या में शिक्षामित्र ग्रामीण और परिषदीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों के बीच शिक्षण कार्य कर रहे इन शिक्षामित्रों के लिए सरकार का यह निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। इसके साथ ही अनुदेशकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ भी मिलेगा, जिससे उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच मिलेगा।

लंबे समय से लंबित मांग पूरी होने से शिक्षामित्रों में उत्साह का माहौल है और विद्यालयों में सकारात्मक वातावरण बनने की उम्मीद जताई जा रही है। आदर्श शिक्षामित्र एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हेमंत शुक्ला ने इसे शिक्षामित्रों के लिए होली का सबसे बड़ा उपहार बताते हुए कहा कि बढ़े हुए मानदेय से परिवार को आर्थिक सहारा मिलेगा और शिक्षामित्र अधिक मनोयोग से बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे सकेंगे।

शिक्षामित्र नीलम यादव ने कहा कि वर्षों से कम मानदेय में सेवा करना कठिन था, लेकिन अब बढ़ा हुआ मानदेय उनके संघर्ष का सम्मान है। वहीं शिक्षामित्र मुक्तनाथ और लवकुश ने कहा कि इस फैसले से आर्थिक मजबूती मिलेगी और चिकित्सा सुविधा मिलने से परिवार को सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ा है।

शिक्षामित्र सुभाष चंद्र बोस, अनुपमा द्विवेदी, इंद्रजीत यादव और नागेंद्र कुमार निषाद सहित अन्य शिक्षामित्रों ने सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए और अधिक प्रेरित होंगे।

शिक्षामित्रों का कहना है कि लंबे समय से आर्थिक दबाव के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था, लेकिन अब सरकार के इस फैसले से उनकी स्थिति में सुधार होगा और वे पूरे समर्पण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकेंगे। यह निर्णय न केवल शिक्षामित्रों के आर्थिक जीवन में बदलाव लाएगा, बल्कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में भी सहायक सिद्ध होगा।

 

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