Anshul Kamboj की गेंदबाजी के मुरीद हुए सुनील गावस्कर, बोले- इंग्लैंड में 127-130 की रफ्तार थी, अब 135 के पार पहुंची स्पीड
नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले वनडे मुकाबले में युवा तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज (Anshul Kamboj) ने अपनी शानदार गेंदबाजी से क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींच लिया। ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेले गए इस मुकाबले में कंबोज ने न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उनकी सटीक लाइन-लेंथ, गेंद की स्विंग और बेहतर रफ्तार ने विपक्षी टीम को लगातार दबाव में रखा। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर भी कंबोज के इस प्रदर्शन से काफी प्रभावित नजर आए।
गावस्कर ने अंशुल कंबोज की गेंदबाजी की तारीफ करते हुए उनकी फिटनेस और रफ्तार में आए सुधार को खास तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल इंग्लैंड दौरे के दौरान कंबोज की गेंदबाजी की गति लगभग 127 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा के आसपास रहती थी, लेकिन अब वह 135 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं।
गावस्कर के मुताबिक, यह बदलाव केवल गेंद की गति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी फिटनेस, आत्मविश्वास और गेंदबाजी की लय में भी सुधार दिखाई दे रहा है। उन्होंने कंबोज की लाइन-लेंथ की भी प्रशंसा की और कहा कि गेंदबाज ने पूरे स्पेल में अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा।
Anshul Kamboj: न्यूजीलैंड के खिलाफ अंशुल कंबोज का शानदार प्रदर्शन
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला वनडे मुकाबला 4 नवंबर 2026 को ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेला गया। इस मैच में भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अंशुल कंबोज की गेंदबाजी विशेष रूप से चर्चा में रही।
कंबोज ने अपने 10 ओवर के पूरे स्पेल में केवल 22 रन खर्च किए और दो विकेट हासिल किए। उन्होंने इस दौरान दो मेडन ओवर भी डाले। उनकी इकॉनमी 2.20 रही, जो वनडे क्रिकेट में इस स्तर के प्रदर्शन को बेहद प्रभावशाली बनाती है।
सबसे खास बात यह रही कि कंबोज ने अपने 60 गेंदों के स्पेल में 46 गेंदें ऐसी डालीं, जिन पर न्यूजीलैंड के बल्लेबाज रन नहीं बना सके। लगातार डॉट गेंदों के कारण विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ता गया और उन्हें जोखिम लेकर शॉट खेलने की जरूरत महसूस होने लगी।
कंबोज ने न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर और नाथन स्मिथ के विकेट हासिल किए। उनकी गेंदबाजी ने भारतीय टीम को मैच में मजबूत स्थिति दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए अंशुल कंबोज को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। 2016 के बाद से वनडे क्रिकेट में किसी भारतीय गेंदबाज का पूरे 10 ओवर के स्पेल में यह सबसे कम रन देने वाला प्रदर्शन बताया गया।
Anshul Kamboj: सुनील गावस्कर ने बताया कैसे बढ़ी कंबोज की रफ्तार
मैच के दौरान सोनी स्पोर्ट्स पर बातचीत करते हुए सुनील गावस्कर ने अंशुल कंबोज की गेंदबाजी का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि कंबोज ने अपने पहले ही ओवर में मेडन डालकर अच्छी शुरुआत की। उनकी गेंद में स्विंग और गति दोनों दिखाई दे रही थीं।
गावस्कर ने पिछले साल इंग्लैंड में कंबोज की गेंदबाजी को याद करते हुए कहा कि उस समय उनकी रफ्तार लगभग 127 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहती थी। अब उनकी गति 135 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा हो गई है।
पूर्व भारतीय कप्तान के अनुसार, गेंदबाज की फिटनेस में आया सुधार इस बदलाव की बड़ी वजह हो सकता है। तेज गेंदबाजी में केवल स्वाभाविक क्षमता ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि शरीर की मजबूती, संतुलन, लय और लगातार गेंदबाजी करने की क्षमता भी अहम भूमिका निभाती है।
कंबोज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में जिस तरह लगातार अपनी गति और लाइन-लेंथ बनाए रखी, उससे उनके प्रदर्शन में आया बदलाव साफ नजर आया।
गावस्कर ने यह भी बताया कि कंबोज की गेंदबाजी में आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था। जब गेंदबाज अपनी योजना को लेकर आश्वस्त होता है और लगातार सही जगह गेंद डालता है, तो उसकी गेंदबाजी अधिक प्रभावी हो जाती है।
Anshul Kamboj: एक भी गेंद मिडिल और लेग स्टंप पर नहीं डाली
सुनील गावस्कर ने अंशुल कंबोज की गेंदबाजी में सबसे खास बात उनकी लाइन-लेंथ को बताया। उन्होंने कहा कि कंबोज ने पूरे स्पेल में बल्लेबाजों को ऑफ स्टंप या उसके बाहर गेंद डालकर चुनौती दी। उनकी गेंदबाजी में अनुशासन साफ दिखाई दिया।
गावस्कर के मुताबिक, कंबोज ने एक भी गेंद मिडिल और लेग स्टंप की लाइन पर नहीं डाली। वह लगातार ऑफ स्टंप के आसपास गेंदबाजी करते रहे। इससे न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के लिए अपने पसंदीदा शॉट खेलना मुश्किल हो गया।
उन्होंने कहा कि जब गेंदबाज अच्छी लय में होता है और उसके मन में नो-बॉल डालने को लेकर कोई संदेह नहीं रहता, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। यही आत्मविश्वास गेंद की गति और गेंदबाजी की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।
कंबोज ने इस मुकाबले में किसी तरह की अतिरिक्त कोशिश करने के बजाय अपनी सामान्य गेंदबाजी योजना पर भरोसा किया। उन्होंने सही जगह गेंद डालने पर ध्यान दिया और लगातार बल्लेबाजों को रन बनाने से रोके रखा।
Anshul Kamboj: ईडन पार्क की पिच से मिली गेंदबाजों को मदद
ऑकलैंड का ईडन पार्क मैदान अपनी परिस्थितियों के कारण तेज गेंदबाजों के लिए उपयोगी माना जाता है। यहां मौसम और पिच की स्थिति के अनुसार गेंद को स्विंग और सीम मूवमेंट मिल सकता है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले वनडे मुकाबले में भी गेंदबाजों को पिच से कुछ सहायता मिली। गेंद सतह से टकराने के बाद हलचल कर रही थी और अतिरिक्त उछाल भी देखने को मिल रहा था।
गावस्कर ने कहा कि न्यूजीलैंड में गेंद को थोड़ी मूवमेंट मिल रही थी। कंबोज ने इस परिस्थिति का अच्छा फायदा उठाया। उनकी गेंदों में सीम मूवमेंट और उछाल था, जिससे बल्लेबाजों के लिए तेजी से शॉट खेलना आसान नहीं रहा।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले कंबोज की गेंदों की गति ऐसी रहती थी, जिस पर बल्लेबाज आसानी से आगे बढ़कर शॉट खेल सकते थे। लेकिन अब उनकी रफ्तार बढ़ने के साथ गेंदबाजी की सटीकता भी बेहतर हुई है।
जब गेंद तेज गति से आती है और पिच से अतिरिक्त उछाल हासिल करती है, तो बल्लेबाज के लिए गेंद की दिशा और लंबाई का सही अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
Anshul Kamboj: टी20 क्रिकेट के दौर में 10 ओवर में 22 रन देना बड़ी उपलब्धि
सुनील गावस्कर ने आधुनिक क्रिकेट में बल्लेबाजों के बदलते रवैये का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट के प्रभाव के कारण वनडे क्रिकेट में भी बल्लेबाजों की सोच काफी बदल गई है।
पहले 50 ओवर के मुकाबलों में बल्लेबाज अक्सर शुरुआत में संभलकर खेलते थे और धीरे-धीरे रन गति बढ़ाते थे। लेकिन अब टी20 क्रिकेट के प्रभाव से वनडे में भी तेजी से रन बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक शॉट खेलने का प्रयास करते हैं। ऐसे समय में किसी गेंदबाज का लगातार 10 ओवर तक रन रोकना आसान नहीं होता।
गावस्कर ने कहा कि इस बदले हुए क्रिकेट के माहौल में कंबोज का 10 ओवर में केवल 22 रन देना और साथ में दो विकेट हासिल करना बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन है।
उनके मुताबिक, कंबोज ने अपनी गेंदबाजी में अनावश्यक प्रयोग नहीं किए। उन्होंने अपनी योजना के मुताबिक लगातार गेंदबाजी की और विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा।
गावस्कर ने यह भी समझाया कि क्रिकेट में कई बार एक छोर से लगातार रन नहीं मिलने के कारण बल्लेबाज दूसरे छोर पर जोखिम लेने लगते हैं। इससे दूसरे गेंदबाज को भी विकेट हासिल करने का मौका मिलता है। इस तरह एक गेंदबाज की किफायती गेंदबाजी पूरी टीम के लिए फायदेमंद साबित होती है।
Anshul Kamboj: अंशुल कंबोज ने भी बताई अपनी गेंदबाजी की रणनीति
मुकाबले के बाद अंशुल कंबोज ने अपनी शानदार गेंदबाजी को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि उनका मुख्य ध्यान सही लाइन और लेंथ पर गेंद डालने का था।
कंबोज के अनुसार, पिच से सीम मूवमेंट मिल रही थी और ऐसी परिस्थितियों में सही लेंथ पर गेंदबाजी करना बेहद जरूरी था। अगर गेंदबाज अपनी लेंथ से चूकता है तो बल्लेबाज आसानी से रन बना सकता है।
उन्होंने बताया कि वह अधिक से अधिक समय तक सही क्षेत्र में गेंदबाजी करने की कोशिश कर रहे थे। उनकी योजना किसी खास तरह की गेंद डालने के बजाय लगातार अच्छी गेंदबाजी करना थी।
कंबोज ने वॉबल सीम का भी इस्तेमाल किया। इस तकनीक में गेंद की सीम की स्थिति के कारण पिच से टकराने के बाद उसकी गति और दिशा में बदलाव हो सकता है। इससे बल्लेबाज के लिए गेंद को समझना कठिन हो सकता है।
उनकी इस रणनीति का फायदा भारतीय टीम को मिला और न्यूजीलैंड के बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में सफल नहीं हो सके।
Anshul Kamboj: कप्तान शुभमन गिल ने भी की अंशुल कंबोज की तारीफ
भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने भी मैच के बाद अंशुल कंबोज के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंबोज न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त गेंदबाज हैं।
गिल के मुताबिक, कंबोज के पास गेंद को सीम कराने की क्षमता है। वह लगातार अच्छी गति से गेंदबाजी करते हैं और पुरानी गेंद से भी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
कप्तान ने यह भी कहा कि जब पिच से ज्यादा मदद नहीं मिलती, तब कंबोज अपनी अतिरिक्त उछाल और गति के जरिए बल्लेबाजों को परेशानी में डाल सकते हैं।
गिल ने अर्शदीप सिंह और गुरनूर बराड़ के प्रदर्शन की भी तारीफ की। इन गेंदबाजों ने मिलकर न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी को दबाव में रखा।
इस मुकाबले में अर्शदीप सिंह ने चार विकेट और गुरनूर बराड़ ने तीन विकेट हासिल किए, जबकि अंशुल कंबोज ने दो विकेट लेकर भारतीय गेंदबाजी को मजबूत बनाया।
Anshul Kamboj: भारत ने पांच विकेट से जीता पहला वनडे
अंशुल कंबोज की शानदार गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 185 रन पर समेट दिया। न्यूजीलैंड की टीम 40.2 ओवर में ऑलआउट हो गई।
हालांकि, बारिश के कारण मुकाबले में लक्ष्य को संशोधित करना पड़ा। भारत को जीत के लिए 31 ओवर में 143 रन बनाने थे।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और रोहित शर्मा पहले ही ओवर में बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद शुभमन गिल और विराट कोहली ने पारी को संभाला।
विराट कोहली ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 51 गेंदों पर 74 रन बनाए। उनकी पारी में आक्रामक शॉट और बेहतरीन टाइमिंग देखने को मिली। शुभमन गिल ने भी 37 रन का योगदान दिया।
हालांकि, भारतीय पारी के बीच में कुछ विकेट जल्दी गिरे, लेकिन टीम ने लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत ने 22.4 ओवर में पांच विकेट खोकर 143 रन बना लिए और मुकाबला पांच विकेट से जीत लिया।
इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की वनडे सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली।
Anshul Kamboj: अंशुल कंबोज के लिए क्यों खास रहा यह मुकाबला?
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में अंशुल कंबोज का प्रदर्शन कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने केवल विकेट हासिल नहीं किए, बल्कि अपनी गेंदबाजी से लगातार दबाव बनाए रखा।
10 ओवर में 22 रन देना किसी भी वनडे गेंदबाज के लिए शानदार प्रदर्शन है। खासकर ऐसे समय में जब बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं, तब रन रोकना और विकेट निकालना गेंदबाज की क्षमता को दिखाता है।
इस प्रदर्शन से कंबोज ने भारतीय टीम में अपनी उपयोगिता भी साबित की। उनकी गति, फिटनेस, सीम गेंदबाजी और अनुशासित लाइन-लेंथ टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सुनील गावस्कर की तारीफ ने भी उनके प्रदर्शन को चर्चा में ला दिया है। पूर्व भारतीय कप्तान ने इंग्लैंड दौरे और न्यूजीलैंड के मुकाबले की तुलना करते हुए जिस तरह उनकी रफ्तार में सुधार की बात कही, उससे कंबोज की मेहनत और तैयारी पर ध्यान गया है।
अब भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की नजर आगामी मुकाबलों पर रहेगी। कंबोज के सामने चुनौती होगी कि वह अपनी इस लय को बरकरार रखें और आने वाले मैचों में भी टीम के लिए उपयोगी प्रदर्शन करें।
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में अंशुल कंबोज ने अपनी गेंदबाजी से खास छाप छोड़ी। 10 ओवर में दो मेडन, 22 रन और दो विकेट के प्रदर्शन ने उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच बनाया। सुनील गावस्कर ने उनकी रफ्तार में आए सुधार को फिटनेस से जोड़ते हुए जमकर तारीफ की। इंग्लैंड में 127-130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी करने वाले कंबोज अब 135 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार हासिल कर रहे हैं। उनका यह प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
