पीएम मोदी ने दी विजयादशमी की शुभकामनाएं, श्रीराम की स्तुति में साझा किया संस्कृत श्लोक

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Modi ) ने मंगलवार को देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शुभकामना संदेश साझा करने के साथ ही भगवान श्रीराम की स्तुति में वाल्मीकि रामायण का एक संस्कृत श्लोक भी पोस्ट किया। प्रधानमंत्री ने कामना की कि विजयादशमी का पर्व सभी के जीवन में सुख, सौभाग्य और सफलता लेकर आए।

PM Modi: पीएम मोदी ने विजयादशमी पर क्या संदेश दिया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं। उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है।”

विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद करने और सत्य, न्याय व कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

https://x.com/narendramodi/status/2112367010541945265

PM Modi: भगवान श्रीराम की स्तुति में साझा किया संस्कृत सुभाषित

प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड के 37वें सर्ग का 13वां श्लोक साझा किया। श्लोक इस प्रकार है:

“रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः। राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥”

इसका हिंदी भावार्थ है कि भगवान श्रीराम साक्षात धर्म के स्वरूप हैं। वे सज्जनों के आश्रय, सत्य के प्रति दृढ़ संकल्प रखने वाले और सत्यपराक्रमी हैं। वे संपूर्ण लोक के ऐसे रक्षक और शासक हैं, जैसे देवराज इंद्र देवलोक का पालन और संरक्षण करते हैं।

यह श्लोक भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, सत्यनिष्ठा और धर्मपरायणता को दर्शाता है। उनके जीवन में पुत्र, भाई, मित्र और राजा के रूप में कर्तव्य पालन को विशेष महत्व मिला। कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा और न्याय का साथ देना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता मानी जाती है।

 

 

PM Modi: विजयादशमी पर श्रीराम के आदर्शों का महत्व

वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम से जुड़े कई प्रसंगों का वर्णन है। रामायण की कथा के अनुसार, जब राक्षस ऋषि-मुनियों को परेशान कर रहे थे, तब श्रीराम ने उनकी रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए संकल्प लिया।

श्लोक में श्रीराम को धर्म का साकार स्वरूप बताने का आशय है कि धर्म केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे जीवन के आचरण में उतारना भी जरूरी है। श्रीराम का चरित्र इसी आदर्श को प्रस्तुत करता है।

विजयादशमी पर देशभर में रामलीला, रावण दहन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व लोगों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, अपने कर्तव्यों का पालन करने और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देता है।

प्रधानमंत्री मोदी के शुभकामना संदेश और संस्कृत सुभाषित के माध्यम से भी भगवान श्रीराम के आदर्शों तथा विजयादशमी के सांस्कृतिक और नैतिक महत्व को रेखांकित किया गया।

 

सोर्स- एजेंसी

 

 

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