Vindhyachal Tourism : विंध्याचल में पर्यटन (Vindhyachal Tourism) का तेजी से विस्तार, ‘विंध्य त्रिकोण’ से यूपी में शक्तिपीठ पर्यटन को मिल रही रफ्तार

* विंध्यवासिनी, काली खोह और अष्टभुजा मंदिरों में 2025 में 1.84 करोड़ दर्शनार्थी पहुंचे, दो वर्षों में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि* विंध्याचल बनेगा यूपी के शक्तिपीठ सर्किट का प्रमुख केंद्र- जयवीर सिंह

रिपोर्ट: मंजय वर्मा 

लखनऊ/मिर्जापुर, 19 अक्टूबर 2026

Vindhyachal Tourism: उत्तर प्रदेश के विंध्याचल में धार्मिक पर्यटन का दायरा अब मां विंध्यवासिनी मंदिर से आगे बढ़कर संपूर्ण ‘विंध्य त्रिकोण’ तक विस्तारित हो रहा है। मां विंध्यवासिनी, मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में वर्ष 2025 के दौरान कुल करीब 1.84 करोड़ दर्शनार्थी पहुंचे। वर्ष 2023 में यह संख्या लगभग 1.15 करोड़ थी। इस तरह दो वर्षों में तीनों मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच सदियों पुरानी विंध्य त्रिकोण परिक्रमा अब धार्मिक पर्यटन की नई पहचान बन रही है। उत्तर प्रदेश सरकार भी शक्तिपीठ सर्किट विकसित कर इस आस्था पथ को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है।

पारंपरिक रूप से यह धार्मिक यात्रा मां विंध्यवासिनी मंदिर से शुरू होकर मां काली खोह मंदिर पहुंचती है और मां अष्टभुजा मंदिर में पूरी होती है। इस परिक्रमा के माध्यम से श्रद्धालु एक ही यात्रा में देवी के तीन स्वरूपों के दर्शन करते हैं।

Vindhyachal Tourism: मां विंध्यवासिनी धाम श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र
विंध्य त्रिकोण अंतर्गत मां विंध्यवासिनी धाम श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। धाम में दर्शनार्थियों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी इसकी गवाही दे रही है। वर्ष 2023 में जहां करीब 73 लाख श्रद्धालु मां के दरबार पहुंचे थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 78.15 लाख और साल 2025 में करीब 1.20 करोड़ तक पहुंच गया। यानी दो साल में श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 64 फीसदी का उछाल आया। आस्था का यह सिलसिला 2026 में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनवरी से अगस्त तक ही करीब 90 लाख श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर चुके थे। यह संख्या पिछले पूरे साल के कुल दर्शनार्थियों की करीब 75 फीसदी है। खास बात यह है कि यह आंकड़ा शारदीय नवरात्र के पहले का है। ऐसे में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने के साथ धाम में दर्शनार्थियों की संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है।

vindhyachal tourism vindhya trikon up shaktipeeth circuitVindhyachal Tourism: काली खोह और अष्टभुजा मंदिरों में भी बढ़े श्रद्धालु
मां विंध्यवासिनी धाम के साथ मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ तेजी से बढ़ी है। विंध्याचल में धार्मिक पर्यटन के विस्तार का असर इन दोनों मंदिरों में दर्शनार्थियों की संख्या पर भी दिख रहा है। वर्ष 2023 में मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में कुल करीब 42.36 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 64 लाख हो गया। यानी दो साल में श्रद्धालुओं की संख्या में 51 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़े बताते हैं कि विंध्याचल आने वाले श्रद्धालु अब मां विंध्यवासिनी के दर्शन के साथ मां काली खोह और मां अष्टभुजा के दरबार में भी हाजिरी लगा रहे हैं। इससे विंध्य त्रिकोण की परिक्रमा धार्मिक पर्यटन के प्रमुख आकर्षण के रूप में उभर रही है।

Vindhyachal Tourism: विंध्याचल बनेगा शक्तिपीठ सर्किट का केंद्र- मंत्री
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘विंध्याचल में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या विकास कार्यों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विंध्याचल धाम को एक मंदिर तक सीमित रखने के बजाय संपूर्ण शक्ति पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विंध्याचल प्रदेश के विस्तारित शक्तिपीठ सर्किट का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तर प्रदेश की समृद्ध शक्ति उपासना परंपरा से जोड़ने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।’

Vindhyachal Tourism: विकास कार्यों से मजबूत हो रहा आधारभूत ढांचा
विंध्याचल में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक स्थलों के कायाकल्प पर करीब 208.09 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत मां की पैड़ी, संपर्क मार्गों, परिक्रमा पथ, आसपास की सड़कों और मुख्य मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विंध्यवासिनी स्वरूप देवी मंदिर के आसपास के विकास के साथ अष्टभुजा और काली खोह क्षेत्र में भी बुनियादी सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं। पहाड़ी मंदिरों तक पहुंच आसान बनाने में रोपवे ने अहम भूमिका निभाई है। इससे बुजुर्गों और परिवारों को विशेष सहूलियत मिली है।

वहीं, त्रिकोण परिक्रमा योजना के तहत मां काली खोह क्षेत्र के विकास के लिए 35.50 करोड़ रुपये की परियोजना अक्टूबर में निविदा प्रक्रिया तक पहुंच गई। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि सरकार का जोर अब केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रहकर पूरे विंध्य त्रिकोण को सुविधायुक्त धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर है।

Vindhyachal Tourism: यूपीएसटीडीसी ने शुरू किए दो धार्मिक टूर पैकेज
विंध्याचल में सुविधाओं के विस्तार के साथ धार्मिक पर्यटन को संगठित रूप देने की पहल भी तेज हुई है। ‘विजिट माय स्टेट’ पहल के तहत उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने दो विशेष यात्रा पैकेज शुरू किए हैं। दो दिन और एक रात के पहले पैकेज में वाराणसी और विंध्याचल को जोड़ा गया है। इसके तहत पर्यटक काशी के मंदिरों व घाटों के साथ ‘विंध्य त्रिकोण’ के तीनों देवी मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे। वहीं, दो रात और तीन दिन का दूसरा पैकेज लखनऊ, वाराणसी, विंध्याचल और प्रयागराज को एक धार्मिक यात्रा सर्किट में पिरोता है। इससे श्रद्धालु मां के धाम में शक्ति उपासना की परंपरा से रूबरू होने के साथ काशी और संगम क्षेत्र के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन भी कर सकेंगे।

Vindhyachal Tourism: धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा- अमृत अभिजात
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘विंध्याचल में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या प्रदेश की सर्किट आधारित पर्यटन रणनीति को मजबूती दे रही है। प्रदेश सरकार का जोर बेहतर कनेक्टिविटी, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं, दर्शन और सुव्यवस्थित यात्रा पैकेजों के जरिए श्रद्धालुओं का सफर आसान बनाने पर है। इससे पर्यटकों का ठहराव बढ़ने के साथ स्थानीय कारोबारियों और समुदायों को भी पर्यटन से होने वाली आय का लाभ मिल सकेगा।’

विंध्य त्रिकोण परिक्रमा को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से होटल, परिवहन, गाइड और खानपान सेवाओं के साथ फूल-माला व प्रसाद कारोबार को विस्तार मिल सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन को गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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