Ram Nath Kovind Autobiography: संघर्ष से राष्ट्रपति भवन तक का सफर, रामनाथ कोविन्द की जिंदगी से युवाओं को मिलेगी प्रेरणा

Ram Nath Kovind Autobiography: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का जीवन संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों को अपनी प्रगति में बाधा बनाने के बजाय उनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राम नाथ कोविन्द ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने मेहनत और संकल्प के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया। उनका जीवन विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं को सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने के बजाय किताबें पढ़ने, अध्ययन करने और अपने व्यक्तित्व के विकास पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किताबों के माध्यम से व्यक्ति को नए विचारों, अनुभवों और जीवन के अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिलता है।

Ram Nath Kovind Autobiography:  सोशल मीडिया की रील के बजाय पढ़ाई पर ध्यान दें युवा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज कई लोग मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन पांच से सात घंटे तक समय बिताते हैं। यदि इस समय का कुछ हिस्सा पढ़ने और नई चीजें सीखने में लगाया जाए, तो इससे व्यक्ति को काफी लाभ मिल सकता है।

उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया पर लाइक और लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश में अपना कीमती समय गंवाने के बजाय वास्तविक जीवन में कुछ बेहतर करने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री के अनुसार, किताबें पढ़ने से ज्ञान बढ़ता है और व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता विकसित होती है।

योगी आदित्यनाथ ने राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की सफलता केवल अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती। कठिन समय में धैर्य बनाए रखना, मेहनत करना और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहना भी उतना ही जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को संदेश दिया कि वे सफल व्यक्तित्वों की जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ें। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिल सकती है कि लोगों ने अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना किस तरह किया और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए क्या प्रयास किए।

Ram Nath Kovind Autobiography: परौंख गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे राम नाथ कोविन्द

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का जीवन ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गांव में हुआ था। उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने के बाद कानून के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई।

वकालत के दौरान उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के अधिवक्ता के रूप में भी कार्य किया। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ा। अप्रैल 1994 में वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए और लगातार दो कार्यकाल तक इस पद पर रहे।

राम नाथ कोविन्द ने बिहार के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद 25 जुलाई 2017 को उन्होंने भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वह 25 जुलाई 2022 तक इस पद पर रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी इस यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्ष और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। राम नाथ कोविन्द का जीवन इस बात का उदाहरण है कि व्यक्ति को अपनी जड़ों और समाज से जुड़े रहना चाहिए।

Ram Nath Kovind Autobiography: आत्मकथा में राष्ट्रपति कार्यकाल के अनुभवों का भी जिक्र

राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ में उनके निजी जीवन के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को भी शामिल किया गया है। पुस्तक में उनके संघर्ष, शिक्षा, कानूनी करियर, राजनीतिक सफर और राष्ट्रपति पद पर रहते हुए किए गए कार्यों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विवरण मिलता है।

इसमें राष्ट्रपति के रूप में उनके पांच साल के कार्यकाल के दौरान सामने आई परिस्थितियों और महत्वपूर्ण निर्णयों से जुड़े अनुभवों का भी उल्लेख है। कोविड-19 महामारी के समय की चुनौतियां, संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल, केंद्र और राज्यों के बीच संबंध तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे विषय भी पुस्तक का हिस्सा हैं।

इसके अलावा, देश के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में राष्ट्रपति की भूमिका और उससे जुड़े दायित्वों पर भी प्रकाश डाला गया है।

इस तरह यह आत्मकथा केवल एक व्यक्ति के जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभवों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है। पाठकों को इसके माध्यम से राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों और देश की शासन व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं के बारे में जानने का मौका मिल सकता है।

Ram Nath Kovind Autobiography:  लोक भवन में आयोजित हुआ पुस्तक विमोचन कार्यक्रम

लखनऊ के लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की उपस्थिति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्व राष्ट्रपति के जीवन अनुभवों और उनकी आत्मकथा को पाठकों तक पहुंचाना रहा। पुस्तक के माध्यम से उनके व्यक्तिगत संघर्ष से लेकर सार्वजनिक जीवन में निभाई गई जिम्मेदारियों तक की यात्रा को समझा जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि समाज में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें व्यक्ति के ज्ञान और व्यक्तित्व को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

Ram Nath Kovind Autobiography: गांव से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा देती है बड़ा संदेश

राम नाथ कोविन्द की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों से निराश होने के बजाय आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। शिक्षा, मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसी पहलू पर जोर देते हुए युवाओं को अध्ययन और आत्मविकास के लिए समय निकालने की सलाह दी। उनका कहना था कि सफल व्यक्तियों के अनुभवों को पढ़ना और समझना युवाओं को अपने लक्ष्य तय करने में मदद कर सकता है।

आज के डिजिटल दौर में जहां मोबाइल फोन और सोशल मीडिया लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं नियमित अध्ययन के लिए समय निकालना भी महत्वपूर्ण है। किताबें पढ़ने से न केवल सामान्य ज्ञान बढ़ता है, बल्कि इतिहास, समाज, संविधान और देश की संस्थाओं को समझने का अवसर भी मिलता है।

पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा का विमोचन इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पुस्तक पाठकों को उनके जीवन के विभिन्न पड़ावों से परिचित कराती है और संघर्ष से सफलता तक की यात्रा को समझने का अवसर देती है।

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