Gyanesh Kumar Removal Demand: मिर्जापुर में भाकपा माले ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
SIR प्रक्रिया पर रोक, मतदाता सूची में नाम बहाल करने और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने की उठाई मांग
Gyanesh Kumar Removal Demand: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी भाकपा (माले) ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को मिर्जापुर में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला सचिव कामरेड जीरा भारती के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयुक्तों के बीच सामने आए मतभेदों को लेकर कई सवाल उठाए गए।
भाकपा (माले) ने अपने ज्ञापन में हाल में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि निर्वाचन आयोग के दो अन्य सदस्यों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों को लेकर कई बार आपत्ति दर्ज कराई। 23 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में भी दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।
हालांकि, इस मामले में निर्वाचन आयोग की ओर से यह कहा गया है कि SIR समेत आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग से जुड़े सूत्रों ने आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच निर्णय प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण दिया था।
भाकपा माले ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
ज्ञापन सौंपते हुए भाकपा (माले) नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि निर्वाचन आयोग के भीतर ही महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर मतभेद की स्थिति बनती है, तो उसकी कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। पार्टी ने कहा कि निर्वाचन आयोग देश में चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था है और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों का सीधा असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है।
भाकपा (माले) ने मांग की कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। पार्टी ने विशेष रूप से SIR प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई और इसे तत्काल रोकने की मांग की।
पार्टी के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके नाम दोबारा बहाल किए जाने चाहिए। संगठन ने यह भी मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में प्रभावित लोगों को पर्याप्त अवसर और जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
14 आपत्तियों का रिपोर्ट में किया गया उल्लेख
भाकपा (माले) के ज्ञापन में 23 सितंबर को सामने आई मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लगभग 10 महीने की अवधि में आयोग के भीतर कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा चुनावी डेटाबेस से जुड़े विषय शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्टों में चुनावी डेटाबेस को केंद्रीकृत करने और Form 6 में बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि आयोग के फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और SIR से जुड़े निर्णयों समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इसी मुद्दे को लेकर भाकपा (माले) ने राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापन में निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें रखी हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन का भी किया जिक्र
ज्ञापन में 25 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया। भाकपा (माले) ने प्रदर्शन के दौरान अपने महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत अन्य लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की निंदा की।
25 सितंबर को जंतर-मंतर पर AISA की ओर से प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग उठाई थी। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस की ओर से बताया गया था कि प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।
इस प्रदर्शन में भाकपा (माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और योगेंद्र यादव समेत कई लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए गए।
भाकपा माले ने राष्ट्रपति के नाम रखीं चार प्रमुख मांगें
मिर्जापुर में सौंपे गए ज्ञापन में भाकपा (माले) ने चार प्रमुख मांगें रखीं। पार्टी ने मांग की कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए। इसके साथ ही SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाने और गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग की गई।
पार्टी ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को बहाल करने की भी मांग की। इसके अलावा निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर भी भाकपा (माले) ने अपनी मांग रखी है। संगठन का कहना है कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित चयन समिति के माध्यम से की जानी चाहिए।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए।
2. SIR प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं।
3. निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली सुनिश्चित की जाए।
4. निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित चयन समिति की व्यवस्था लागू की जाए।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
मिर्जापुर में आयोजित इस कार्यक्रम में भाकपा (माले) के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में कामरेड धनराज, कामरेड कौशल्या, कामरेड शिव कुमारी, कामरेड चिंतामणि, भोला कोल, सुरेश बियार, चिंता बियार, जगन्नाथ, रामकृत बियार, संदीप सौरभ, बसंत कोल, रामधार गुप्ता, रवीश कुमार, ओम प्रकाश पटेल, अमरेश पटेल, कंचन वर्मा, राजेश वर्मा और राजाराम यादव समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे उठाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि का सीधा प्रभाव मतदाताओं के अधिकार पर पड़ सकता है, इसलिए पुनरीक्षण प्रक्रिया में सावधानी और पारदर्शिता जरूरी है।
SIR को लेकर जारी है बहस
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच बहस जारी है। एक ओर कुछ राजनीतिक दल और संगठन प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं निर्वाचन आयोग ने अपने फैसलों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।
मिर्जापुर में भाकपा (माले) का ज्ञापन इसी व्यापक विवाद के बीच सामने आया है। पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन के माध्यम से अपनी चार प्रमुख मांगें रखी हैं। अब इन मांगों पर प्रशासन और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।
