Rampur Heavy Rain Crop Damage:  रामपुर में भारी बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान, किसानों ने मुआवजे और कर्जमाफी की मांग उठाई

कई गांवों में खेतों में भरा पानी, भारतीय किसान यूनियन ने गांव-गांव पहुंचकर लिया फसलों की स्थिति का जायजा; बीमा कंपनियों से भी तत्काल सर्वे कराने की मांग

Rampur Heavy Rain Crop Damage:  जनपद रामपुर में पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही भारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से धान समेत कई अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर खेतों में फसलों की स्थिति का जायजा लिया। किसान संगठन का दावा है कि कई क्षेत्रों में धान की फसल बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है और कुछ गांवों में खेतों में खड़ी फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।

भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं के अनुसार, मिसरी नगर, बकैणिया, जोलपुर, लदौरा, हसनपुर, घनश्यामपुर, सेथपुर, मढ़ौली, बीसरा और बीसरी सहित कई गांवों में बारिश के बाद खेतों में पानी जमा हो गया है। पानी भरने के कारण धान की फसल के प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। संगठन का कहना है कि यदि बारिश और जलभराव की स्थिति बनी रही तो फसल को और नुकसान हो सकता है।

खेतों में पानी भरने से किसानों की बढ़ी चिंता

धान की फसल के लिए लगातार बारिश और खेतों में लंबे समय तक पानी का जमा रहना किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। किसान इस समय फसल के अंतिम चरण से जुड़े कामों को लेकर भी तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक हुई भारी बारिश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव हसीब अहमद ने कहा कि बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे जनपद में राजस्व और कृषि विभाग की टीमों के माध्यम से निष्पक्ष सर्वे कराया जाए, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सके।

हसीब अहमद के मुताबिक, जिन किसानों की फसल बारिश और जलभराव से प्रभावित हुई है, उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेतों में पानी भरे होने के कारण कई स्थानों पर धान की फसल के बचने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

हालांकि, फसल नुकसान की वास्तविक मात्रा और किसानों को हुए कुल आर्थिक नुकसान का आधिकारिक आकलन सरकारी सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। किसान संगठन ने इसी वजह से जल्द से जल्द सर्वे कराने की मांग की है।

गांव-गांव सर्वे कराने की मांग

भारतीय किसान यूनियन ने कहा है कि केवल कुछ क्षेत्रों का निरीक्षण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे जनपद में प्रभावित गांवों का सर्वे कराया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि बारिश से जिन-जिन क्षेत्रों में फसल प्रभावित हुई है, वहां प्रशासनिक और कृषि विभाग की टीमें पहुंचकर खेतों की स्थिति का जायजा लें।

किसान संगठन के मुताबिक, सर्वे के दौरान खेत में खड़ी फसल, जलभराव की स्थिति और फसल के नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाना चाहिए। इसके आधार पर प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने से पहले ही बारिश के कारण नुकसान होने पर उनकी पूरी साल की मेहनत प्रभावित हो सकती है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर किसानों को पहले ही खर्च करना पड़ता है। ऐसे में फसल खराब होने पर किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

बीमा कंपनियों से भी तत्काल सर्वे की मांग

भारतीय किसान यूनियन ने सरकार के साथ-साथ फसल बीमा कंपनियों से भी तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संगठन के प्रदेश महासचिव हसीब अहमद ने कहा कि जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है, उनके खेतों में बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि पहुंचकर नुकसान का आकलन करें।

किसान संगठन का कहना है कि बीमित किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में संबंधित नियमों और बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए नुकसान की सूचना दर्ज कराने, सर्वे कराने और दावे के निस्तारण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की गई है।

संगठन ने कहा कि भारी बारिश जैसी परिस्थितियों में किसानों को बीमा दावे की प्रक्रिया के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित किसानों के दावों का नियमानुसार समयबद्ध निस्तारण किया जाना चाहिए।

कृषि ऋण में राहत की मांग

बारिश से फसल नुकसान के बीच भारतीय किसान यूनियन ने किसानों के कृषि ऋण को लेकर भी सरकार के सामने मांग रखी है। संगठन ने कहा कि जिन किसानों की फसल भारी बारिश और जलभराव के कारण बर्बाद हुई है, उन्हें आर्थिक संकट से राहत देने के लिए सोसाइटी, बैंक और अन्य संस्थानों से जुड़े कृषि ऋण पर राहत दी जानी चाहिए।

हसीब अहमद ने मांग की कि आपदा की स्थिति को देखते हुए प्रभावित किसानों के कृषि ऋण माफ करने की दिशा में तत्काल निर्णय लिया जाए। किसान संगठन का तर्क है कि यदि फसल से होने वाली आमदनी प्रभावित हो जाती है तो किसानों के लिए कृषि लागत के साथ-साथ ऋण की किस्तों और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

हालांकि, कर्जमाफी या ऋण राहत को लेकर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित वित्तीय संस्थानों की नीतियों के अनुसार ही होगा। किसान संगठन ने सरकार से इस संबंध में तत्काल घोषणा करने की मांग की है।

प्रशासन से जल्द राहत की उम्मीद

रामपुर में बारिश से प्रभावित किसानों की नजर अब प्रशासन की ओर है। किसान चाहते हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द सर्वे कराया जाए और नुकसान का सही आंकलन सामने लाया जाए। इसके बाद सरकारी नियमों के तहत पात्र किसानों को मुआवजा या राहत राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

भारतीय किसान यूनियन ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को केवल आश्वासन के बजाय जमीनी स्तर पर राहत की जरूरत है। संगठन ने मांग की कि कृषि विभाग, राजस्व विभाग और बीमा कंपनियां आपसी समन्वय के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करें।

किसान संगठन के अनुसार, मिसरी नगर से लेकर बीसरी और आसपास के अन्य गांवों तक बारिश के कारण फसलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में नुकसान का समय पर आकलन करना जरूरी है, ताकि किसानों को राहत उपलब्ध कराने में देरी न हो।

किसानों ने रखीं ये प्रमुख मांगें

भारतीय किसान यूनियन ने रामपुर में बारिश से प्रभावित किसानों के लिए कई मांगें प्रशासन और सरकार के सामने रखी हैं। इनमें पूरे जनपद में फसल नुकसान का निष्पक्ष सर्वे, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा, फसल बीमा कराने वाले किसानों के नुकसान का बीमा कंपनियों से तत्काल सर्वे और नियमानुसार बीमा राशि का भुगतान प्रमुख रूप से शामिल है।

इसके अलावा संगठन ने आपदा की स्थिति को देखते हुए प्रभावित किसानों के कृषि ऋण में राहत और कर्जमाफी की घोषणा करने की मांग भी की है।

फिलहाल बारिश से फसल को हुए वास्तविक नुकसान का आंकड़ा आधिकारिक सर्वे के बाद ही सामने आएगा। प्रशासनिक स्तर पर होने वाला सर्वे यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि कितने क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है और कितने किसान राहत के दायरे में आते हैं। किसानों और किसान संगठनों की मांग है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए, ताकि फसल नुकसान के बाद पैदा हुए आर्थिक संकट में उन्हें समय पर सहायता मिल सके।

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