Global Kayastha Conference: ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस ने जारी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं प्रकोष्ठ प्रभारियों की सूची, संगठन विस्तार पर जोर

पटना। ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस (Global Kayastha Conference) ने संगठनात्मक विस्तार और विभिन्न प्रकोष्ठों के बेहतर संचालन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पदाधिकारियों एवं प्रकोष्ठ प्रभारियों की नई जिम्मेदारियों की घोषणा की है। संगठन की ओर से जारी नई सूची में देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं। जीकेसी का कहना है कि नई जिम्मेदारियों के जरिए संगठन को सभी राज्यों में और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद की ओर से जारी सूची में राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय प्रभारी, अध्यक्ष और महासचिवों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। संगठन का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे पदाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और समाज से जुड़े सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा सेवा कार्यों को गति देना है।

राष्ट्रीय पदाधिकारियों को सौंपी गई नई जिम्मेदारियां

जारी सूची के अनुसार रागिनी रंजन को प्रबंध न्यासी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं नवीन कुमार को राष्ट्रीय महासचिव, डॉ. आदित्य नाग को वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा कमल किशोर को उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है।

इसके अलावा  प्रियरंजन, संजय कुमार सिन्हा, डॉ. हीरालाल कर्ण, अनुराग श्रीवास्तव, डॉ. कुमार मानवेंद्र, आलोक श्रीवास्तव, प्रभाकर श्रीवास्तव, राजीव कांत, सोमिका श्रीवास्तव और दीप श्रेष्ठ को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संगठन की ओर से बताया गया कि निलेश रंजन को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के साथ सदस्यता अभियान संयोजक की जिम्मेदारी भी दी गई है। सदस्यता अभियान के माध्यम से संगठन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

वहीं सुबाला वर्मा, दिलीप कुमार सिन्हा और अमित श्रीवास्तव रिंकू को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। मुकेश महान और अतुल आनंद सन्नू को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है। इसके साथ ही अनिल कुमार दास और सुभाषिणी स्वरूप को समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अलग-अलग प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय प्रभार की घोषणा

जीकेसी की नई संगठनात्मक व्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रकोष्ठों को भी अलग-अलग राष्ट्रीय प्रभारियों के अधीन किया गया है। ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार रागिनी रंजन को महिला, कला एवं संस्कृति, कुटीर उद्योग तथा पर्यावरण प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ दीपश्रेष्ठ को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

इसी क्रम में शुभ्रांशु श्रीवास्तव को डिजिटल मीडिया का राष्ट्रीय प्रभार सौंपा गया है, जबकि निष्का रंजन को सीसीसीआई का राष्ट्रीय प्रभार दिया गया है। संगठन के कोष प्रबंधन की जिम्मेदारी नवीन कुमार को सौंपी गई है।

युवा, शिक्षा एवं समन्वय से जुड़े कार्यों के लिए डॉ. आदित्य नाग को राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ सुबाला वर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन की ओर से इन प्रकोष्ठों के माध्यम से युवाओं और शिक्षा से जुड़े विषयों पर गतिविधियों को आगे बढ़ाने तथा संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय को बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा।

वहीं मेडिकल प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय प्रभार डॉ. कुमार मानवेंद्र को दिया गया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़े सामाजिक कार्यों को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने में इस प्रकोष्ठ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दूसरी ओर मीडिया प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय प्रभार कमल किशोर को सौंपा गया है।

 महिला, युवा, कला और संस्कृति सहित कई प्रकोष्ठों को मिली जिम्मेदारी

जीकेसी की ओर से प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय अध्यक्षों एवं महासचिवों की सूची भी जारी की गई है। इसके अनुसार महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सपना वर्मा को बनाया गया है। वहीं युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाला सौरभ वर्मा होंगे।

सीसीसीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्र भानु सिन्हा तथा राष्ट्रीय महासचिव रंजीत कुमार वर्मा को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजन कुमार और राष्ट्रीय महासचिव शिवानी गौड़ को बनाया गया है।

इसके अलावा डिजिटल मीडिया की जिम्मेदारी नवीन श्रीवास्तव,मीडिया की जिम्मेदारी संतोष श्रीवास्तव, राजनीतिक मामलों की जिम्मेदारी नितिन माथुर तथा लीगल सेल की जिम्मेदारी श्वेतांक सैलकवाल को दी गई है।

इन नियुक्तियों के जरिए संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। इससे संबंधित प्रकोष्ठों के कामकाज को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने और राष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना है।

सभी राज्यों में संगठन को मजबूत करने पर जोर

ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि नई जिम्मेदारियों के माध्यम से संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीकेसी का संगठन सभी राज्यों में विस्तार और मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने संगठन के विस्तार के साथ-साथ कायस्थ समाज को संगठित करने और सामाजिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उनके अनुसार संगठन के माध्यम से सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सेवा गतिविधियों को गति देने का प्रयास किया जाएगा।

नई जिम्मेदारियों में महिला, युवा, शिक्षा, चिकित्सा, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, कुटीर उद्योग, डिजिटल मीडिया, मीडिया, कानूनी मामलों और राजनीतिक मामलों जैसे विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इससे संगठन की गतिविधियों को अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित करने के लिए जिम्मेदारियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।

 संगठनात्मक विस्तार के साथ सामाजिक गतिविधियों को गति देने की तैयारी

जीकेसी की नई राष्ट्रीय सूची ऐसे समय में सामने आई है, जब संगठन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर अपने नेटवर्क को मजबूत करने और विभिन्न राज्यों में गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। नई जिम्मेदारियों के तहत पदाधिकारियों और प्रकोष्ठ प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की भूमिका दी गई है।

संगठन के अनुसार सदस्यता अभियान, महिला सशक्तिकरण, युवा गतिविधियां, शिक्षा, स्वास्थ्य, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही समाज के लोगों को विभिन्न सामाजिक और सेवा गतिविधियों से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

जीकेसी नेतृत्व का कहना है कि किसी भी संगठन के प्रभावी संचालन के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन और बेहतर समन्वय जरूरी है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय पदाधिकारियों और प्रकोष्ठों के प्रभारियों की नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

नई सूची के माध्यम से संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित करने का संकेत दिया है। आने वाले समय में इन पदाधिकारियों और प्रकोष्ठों के माध्यम से विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों को विस्तार देने के साथ सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सेवा से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की योजना है।

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