नई दिल्ली: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में करीब 100 से 125 साल पुराने हिंदू मंदिर को गिराए जाने का मामला सामने आया है। यह मंदिर नरोवाल जिले के सिराज गांव में करीब 1,000 वर्ग मीटर जमीन पर बना था। मंदिर के ढहने को लेकर स्थानीय लोगों, अल्पसंख्यक संगठनों और एक राजनीतिक दल की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
स्थानीय लोगों और अल्पसंख्यक संगठनों का आरोप है कि 21 अगस्त को कुछ धार्मिक कट्टरपंथियों ने मंदिर को गिराया, ताकि उसकी जमीन को पास के मदरसे में शामिल किया जा सके। हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि पुराना मंदिर भारी बारिश के कारण ढह गया।
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी ने की कार्रवाई की मांग
मामले में पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (PMMP) ने पंजाब सरकार से कार्रवाई करने और मंदिर का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। पार्टी के चेयरमैन असलम परवेज सहोत्रा ने बताया कि उन्होंने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात कर लिखित शिकायत दी थी।
असलम परवेज सहोत्रा का आरोप है कि मंदिर गिराए जाने के बाद उसके शिखर की धातु की फिटिंग, ईंटें और दूसरी सामग्री भी वहां से हटा दी गई। उन्होंने पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की है।
मदरसे की जमीन और लीज को लेकर क्या है विवाद?
असलम परवेज सहोत्रा के मुताबिक, मंदिर से लगी जमीन को पहले इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने मदरसा बनाने के लिए लीज पर दिया था। उनका दावा है कि कई वर्षों तक किराया नहीं चुकाया गया और परिसर का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुसार नहीं हुआ, जिसके बाद यह लीज रद्द कर दी गई थी।
उनके अनुसार, लीज रद्द होने के बाद भी कुछ लोगों ने संपत्ति के हिस्सों पर कथित तौर पर अवैध कब्जा कर लिया। सहोत्रा ने आरोप लगाया कि जब कब्जा हटाने की कार्रवाई की बात आई, तब तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) ने मंदिर को गिराकर उसे मदरसे में मिला दिया। यह आरोप है; सरकारी पक्ष ने इसे मंदिर के बारिश में ढहने की घटना बताया है।
29 जनवरी को दिया गया था कब्जा हटाने का आदेश
असलम परवेज सहोत्रा ने बताया कि ETPB के सियालकोट डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर ने 29 जनवरी 2026 को मदरसे की लीज रद्द करने, कथित अवैध कब्जाधारियों को हटाने और संपत्ति को सील करने का आदेश दिया था। उनका आरोप है कि इस आदेश को लागू नहीं किया गया।
यानी इस विवाद की एक अहम कड़ी मंदिर के आसपास की जमीन और उस पर कथित कब्जे से जुड़ी है। एक पक्ष इसे मंदिर की जमीन को मदरसे में मिलाने की कार्रवाई बता रहा है, जबकि सरकारी अधिकारी मंदिर के ढहने की वजह भारी बारिश बता रहे हैं।
हिंदू समुदाय ने की मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग
हिंदू समुदाय के नेता रतन लाल ने मंदिर गिराए जाने की निंदा की और इसके पुनर्निर्माण की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और ETPB मंदिर की सुरक्षा करने में नाकाम रहे।
रतन लाल के मुताबिक, मदरसे की वजह से लोग अब मंदिर की जगह पर जाने से भी डरते हैं। वहीं PMMP ने पंजाब में हिंदू मंदिरों, सिख गुरुद्वारों और ईसाई चर्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
अधिकारियों ने क्या कहा?
ETPB के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार ने मंदिर की उम्र करीब 100 से 125 साल बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि मंदिर भारी बारिश के कारण ढह गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर की जमीन किसी को लीज पर नहीं दी गई थी।
इस तरह मंदिर के ढहने की वजह और जमीन के इस्तेमाल को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है। एक तरफ PMMP और हिंदू समुदाय के नेताओं की ओर से कार्रवाई और पुनर्निर्माण की मांग की जा रही है, जबकि ETPB के अधिकारी इसे बारिश से हुआ ढहना बता रहे हैं।
पूरा विवाद
पूरे मामले में तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं—पहली, नरोवाल के सिराज गांव में स्थित 100 से 125 साल पुराने मंदिर का ढहना; दूसरी, मंदिर से लगी जमीन और मदरसे की लीज को लेकर विवाद; और तीसरी, मंदिर के ढहने की वजह को लेकर अलग-अलग दावे।
PMMP और हिंदू समुदाय के नेताओं ने जहां मंदिर की सुरक्षा में प्रशासन की विफलता का आरोप लगाया है, वहीं ETPB के वरिष्ठ अधिकारी ने मंदिर के बारिश के कारण ढहने की बात कही है। फिलहाल मंदिर की जमीन और उसके आसपास कथित कब्जे को लेकर लगाए गए आरोपों पर विवाद बना हुआ है।
