सरहद पर जवानों को छात्राओं ने बांधी राखी, देश की बेटियों ने दिया भाईचारे और सुरक्षा का संदेश
प्रो. लक्ष्मी कांता चावला की अगुवाई में अटारी-वाघा बॉर्डर पहुंचीं छात्राएं, बीएसएफ जवानों को बांधी राखी
-59 वर्षों से सीमा पर जवानों के साथ रक्षाबंधन मना रही हैं प्रो. लक्ष्मी कांता चावला
-बीएसएफ जवान बोले—देशवासियों के प्यार से बढ़ता है हौसला, देश की सुरक्षा के लिए हर समय तैयार
Amritsar: अपने घर-परिवार से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में 24 घंटे तैनात रहने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों के लिए रक्षाबंधन का पर्व भावुक और खुशी भरा अवसर बन गया। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पंजाब प्रो. लक्ष्मी कांता चावला की अगुवाई में छात्राओं और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंची बेटियों ने अटारी-वाघा सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों को राखी बांधकर उन्हें बहनों का प्यार दिया। छात्राओं ने इस अवसर पर यह संदेश भी दिया कि देश की सुरक्षा में जुटे जवान अकेले नहीं हैं, बल्कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
प्रो. लक्ष्मी कांता चावला पिछले 59 वर्षों से सीमा पर ड्यूटी दे रहे जवानों के साथ रक्षाबंधन मनाती आ रही हैं। उनका कहना है कि जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में परिवार से दूर रहकर देश की रक्षा करते हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन उन्हें परिवार और बहनों की कमी महसूस न हो, इसी उद्देश्य से वह लगातार सीमा पर पहुंचकर जवानों को राखी बांधती हैं।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने बीएसएफ के जवानों की कलाइयों पर राखियां बांधीं और मिठाइयां खिलाईं। छात्राओं ने कहा कि जवान जिस तरह दिन-रात देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी तरह देश की बेटियां भी उनके प्रति अपना भाईचारा और सम्मान व्यक्त करने के लिए सीमा तक पहुंची हैं। बीएसएफ अधिकारियों और जवानों ने भी इस भावनात्मक पहल पर खुशी जताई।
प्रो. चावला ने कहा कि समय के साथ देश की सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका भी लगातार बढ़ी है। आज बेटी और बेटा दोनों देश की सेवा और सुरक्षा में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं, बल्कि देश की रक्षा करने वाले जवानों और देशवासियों के बीच प्रेम, विश्वास और सम्मान का प्रतीक भी बन गया है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान जब पूरा देश अपने परिवारों के साथ खुशियां मनाता है, तब सीमा पर तैनात जवान अपनी ड्यूटी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आई बहनों द्वारा राखी बांधने से उन्हें परिवार से दूर रहने की कमी महसूस नहीं होती और उनका मनोबल बढ़ता है। जवानों ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि बीएसएफ पूरी तरह सतर्क है और देश की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
इस मौके पर छात्रा शिवांगी ने कहा कि सीमा पर आकर जवानों को राखी बांधना उनके लिए गर्व और भावुकता का क्षण है। उन्होंने कहा कि यहां सभी लोगों को एकजुट होकर देश और समाज की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।
राखी बांधने के बाद प्रो. लक्ष्मी कांता चावला खासा स्थित आर्मी हेडक्वार्टर भी पहुंचीं, जहां उन्होंने सेना के जवानों को राखी बांधकर बहनों का प्यार दिया। इस दौरान रक्षाबंधन का पर्व देश की बेटियों, सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवानों के बीच राष्ट्रप्रेम, सम्मान और भाईचारे के मजबूत रिश्ते का प्रतीक बन गया।
