भारत की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षा: क्या बनेगा दुनिया का अगला फैक्ट्री हब?

नई दिल्ली: भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की महत्वाकांक्षा अभी पूरी तरह साकार नहीं हुई है, लेकिन कई राज्यों और कंपनियों के स्तर पर हो रहे प्रयासों से तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी लंबे समय से GDP के करीब 16% के आसपास बनी हुई है, जबकि सरकार का लक्ष्य इसे 25% तक ले जाने का रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग में भारत के सामने बड़ी चुनौती

भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसके पास विशाल क्षेत्रफल, 610 मिलियन से अधिक की श्रम शक्ति और बड़े उद्योग समूह हैं। इसके बावजूद देश में मैन्युफैक्चरिंग उस गति से नहीं बढ़ी है जिसकी उम्मीद की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), इनोवेशन, जमीन की उपलब्धता, मंजूरियों में देरी, स्किल्स और कंपनियों को बड़े स्तर पर विस्तार करने में आने वाली दिक्कतें प्रमुख चुनौतियां हैं।

सरकार ने उठाए कई कदम

भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए सरकार ने Make in India अभियान शुरू किया था। इसके बाद Production Linked Incentive (PLI), Employment Linked Incentive, Research Development and Innovation Fund, Jan Vishwas Act, MSME सपोर्ट, Labour Codes और Plug-and-Play Industrial Parks जैसी पहल की गईं। Make in India 2.0 के तहत कई सेक्टरों को शामिल किया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए टैक्स संबंधी प्रोत्साहनों की घोषणा की है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ी रफ्तार

रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रयासों का असर कुछ क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में सात गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना, मोबाइल फोन उत्पादन में 32 गुना और मोबाइल फोन निर्यात में 165 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। देश में छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स भी मंजूर किए गए हैं।

गुजरात, यूपी और तमिलनाडु आगे

विश्लेषण में अलग-अलग मानकों के आधार पर गुजरात को देश का शीर्ष मैन्युफैक्चरिंग राज्य बताया गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान है। तमिलनाडु अभी भी देश में सबसे ज्यादा फैक्ट्रियों और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में रोजगार देने वाले राज्यों में प्रमुख है।

पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े श्रमिकों, निवेशित पूंजी और राज्य की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग के योगदान के मामले में आगे है।

10 जिलों से करीब 40% मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट

रिपोर्ट में बताया गया है कि FY26 में भारत के मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट का करीब 40% हिस्सा सिर्फ 10 जिलों से आया। गुजरात का जामनगर करीब 36.6 अरब डॉलर के निर्यात के साथ सबसे बड़ा एक्सपोर्टिंग जिला रहा। इसके बाद तमिलनाडु का कांचीपुरम प्रमुख स्थान पर रहा।

चीन के साथ मुकाबले में भारत के लिए मौका

चीन अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था है। हालांकि, वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को एक ही देश पर निर्भर रखने के बजाय China+1, nearshoring और friendshoring जैसी रणनीतियां अपना रही हैं। इससे भारत के सामने मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर बन रहा है।

Assocham के चीफ इकोनॉमिस्ट S.P. Sharma का अनुमान है कि भारत अगले 25 वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार 12% की वृद्धि हासिल करने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक, अगले दशक में अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 25% तक पहुंच सकती है।

2035 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर का अवसर

Morgan Stanley की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग का अवसर करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर का हो सकता है। इसके पीछे औद्योगिक नीतियां, सरकारी पूंजीगत खर्च, निर्यात बढ़ाने के प्रयास और वैश्विक कंपनियों की सप्लाई चेन में विविधता लाने की रणनीति को प्रमुख कारण माना गया है।

Morgan Stanley की Upasana Chachra, Chief India Economist, के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा संक्रमण से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

R&D और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने के लिए R&D में निवेश बढ़ाना भी जरूरी माना जा रहा है। FY24 में भारत का सकल R&D खर्च GDP के 0.84% तक पहुंचा, हालांकि यह NITI Aayog की 2% की सिफारिश से अभी काफी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्नोलॉजी, AI और इनोवेशन के बढ़ते इस्तेमाल से भारतीय कंपनियों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया जा सकता है।

भारत के सामने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा बनाने का अवसर है, लेकिन इसके लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी। जमीन, श्रम, स्किल्स, रेगुलेशन, R&D और निजी निवेश से जुड़ी चुनौतियों को लगातार दूर करना होगा। वहीं मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियां संकेत देती हैं कि भारत कुछ महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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