उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान का मुद्दा राज्यसभा में उठा।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा- बिना किसी धर्म या समुदाय का नाम लिए उठाए गए सरकारी मुद्दों के बाद ऐसा व्यवहार क्या लोकतंत्र और संविधान की रक्षा है?
खरगे के इस सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि जो कुछ भी हुआ वह दुखद है। ऐसी घटना आपके लिए ही नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए दुखद है। हम इसकी जांच करेंगे।
क्या बोले मल्लिकार्जुन खरगे
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “…मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे। उस समय, मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार से जुड़े मुद्दों को दोहराया।
लेकिन मेरे भाषण के बाद, बीजेपी के लोगों ने उस मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए वहां हवन किया… क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं विपक्ष का नेता हूं।”
मैं अनुसूचित जाति से आता हूं..
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आगे कहा, “मैं इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता। मैं बरसों से इस सदन का सदस्य रहा हूं। मैं अनुसूचित जाति से आता हूं और दलित हूं, मैंने कभी किसी से यह गुहार नहीं लगाई कि ‘मेरी मदद करो’ या ‘मेरी रक्षा करो’।
मुझमें लड़ने की ताकत है और मैं लड़ता भी हूं। लेकिन आप मेरे साथ अछूत जैसा बर्ताव करते हैं, ‘शुद्धिकरण’ करते हैं और मेरा अपमान करते हैं।”
राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा कहते हैं, “मैंने पहले ही कहा है कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती है। यह हम सभी के लिए, पूरे देश के लिए अफसोस की बात है। हम इसकी जांच करेंगे। लेकिन अगर खड़गे साहब कहते हैं कि ‘आप ऐसा करते हैं’, तो यह सही नहीं है..
