मिर्जापुर में 50 साल बाद शुरू हुआ सर्वे, DM की पहल और SDM/SLAO गुलाब चन्द्र की मेहनत लाई रंग

  • मंजय वर्मा की रिपोर्ट 

मिर्जापुर, 2026 | तहसील लालगंज के ग्राम डांगरखेड़ी के लिए 26 अप्रैल 1979 के बाद आज का दिन ऐतिहासिक बन गया। 50 वर्षों से अभिलेखीय त्रुटि के कारण लंबित पड़ा सर्वे कार्य जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार (IAS) के निर्देश और SDM सदर गुलाब चन्द्र के अथक प्रयासों से महज 50 दिन में शुरू करा दिया गया।

आधी सदी से अटका था गांव का भविष्य
ग्राम डांगरखेड़ी 1375 फसली के बंदोबस्त और पुनरीक्षित खतौनी में विसंगति के चलते बिना खतौनी के ही चल रहा था। इसी कारण गांव के किसान न तो फॉर्मर रजिस्ट्री करा पा रहे थे, न किसान क्रेडिट कार्ड और न ही अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे थे। सर्वे टीम के लिए भी यह तय करना मुश्किल था कि आखिर सर्वे किस आधार पर शुरू किया जाए।

‘सर्वे जन चौपाल’ से खुली गुत्थी
मई 2026 में SDM सदर गुलाब चन्द्र को सहायक अभिलेख अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार मिला। DM पवन गंगवार ने 50 साल पुराना यह लंबित कार्य उन्हें सौंपा।

जिम्मेदारी मिलते ही SDM गुलाब चन्द्र ने ग्राम डांगरखेड़ी में सर्वे जन चौपाल का आयोजन किया। चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सर्वे कानूनगो और 2-3 सर्वे लेखपाल मौजूद रहे। SDM ने स्वयं ग्रामीणों के सामने पुरानी खतौनी पढ़ी। एक-एक खाता और खातेदार का नाम पढ़कर कास्तकारों से तसदीक कराई।

सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार प्रताप नारायण ओझा के मार्गदर्शन में बंदोबस्त और मानचित्र से मिलान किया गया। पुराने गाटा नंबर से बने नए गाटा नंबर और हस्तांतरित क्षेत्रफल का मिलान कर 1375 फसली की अनंतिम खतौनी तैयार कर ली गई। यही अब आगे की सर्वे प्रक्रिया का आधार बनेगी।

अब क्या होगा आगे
1. ऑनलाइन: ग्राम डांगरखेड़ी को राजस्व परिषद लखनऊ के पोर्टल पर ऑनलाइन करने के लिए पत्र भेजा जा चुका है।
2. नामांतरण: पोर्टल पर नाम आते ही 1979 से हुए बैनामे और मृतक खातेदारों के वारिसों का नाम उत्तराधिकारी के रूप में दर्ज होगा।
3. समयसीमा: राजस्व परिषद और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देश पर सर्वे कार्य अतिशीघ्र पूर्ण किया जाएगा। 3 से 6 महीने में सर्वे पूरा कर नए बंदोबस्त तैयार करने का लक्ष्य है। तहसील लालगंज को दिसंबर 2026 तक नए बंदोबस्त सुपुर्द किए जाने की संभावना है।

ग्रामीणों में खुशी
DM की पहल और SDM गुलाब चन्द्र की फील्ड में उतरकर काम करने की शैली से ग्रामीणों में खुशी है। अब उन्हें उम्मीद है कि अन्य गांवों की तरह उन्हें भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.