जिले के 288 गांवों में सींचेवाल मॉडल से दूषित पानी के तालाबों का होगा कायाकल्प

ऐलनाबाद , 03 जुलाई(एम पी भार्गव): जिला के 288 गांवों में दूषित पानी के तालाबों का जल्द कायाकल्प होगा, ग्रामीणों को न केवल दूषित पानी की निकासी का स्थायी समाधान मिलेगा, बल्कि स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण भी मिलेगा। यही नहीं ग्राम पंचायतों को भी अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत इस कार्य को सींचेवाल मॉडल के अनुरूप सिरे चढ़ाया जा रहा है।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गांव नेजाडेला में 22  लाख रुपये की लागत से ग्रे वाटर मैनेजमेंट का सफल मॉडल ग्रामीण स्वच्छता की दिशा में एक मिसाल बनकर उभरा है। गांव में घरों से निकलने वाले गंदे पानी के समुचित प्रबंधन के लिए सींचेवाल मॉडल के तहत तालाब विकसित किया गया है। पूरे गांव का गंदा पानी इस तालाब में पहुंचता है, जिससे गांव की गलियों में जलभराव और गंदे पानी की समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस मॉडल से न केवल गांव का वातावरण स्वच्छ हुआ है, बल्कि पंचायत के लिए आय का एक नया स्रोत भी विकसित हुआ है।

डीपीएम सुखविंद्र सिंह ने बताया कि इस परियोजना पर लगभग 22 लाख रुपये की लागत आई है। उपचारित पानी वाले इस तालाब का उपयोग केवल गंदे पानी के प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे रोजगार से भी जोड़ा गया है। तालाब में मछलियां छोड़ी गई हैं, जिनके पालन और ठेके से ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष लगभग 70 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार यह परियोजना स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने का कार्य कर रही है।

अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल ने कहा कि नेजाडेला में स्थापित सींचेवाल मॉडल गंदे पानी की निकासी और उसके प्रभावी प्रबंधन के लिए अत्यंत कारगर सिद्ध हो रहा है। जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ वातावरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में जिले के 288 गांवों में भी गंदे पानी की समुचित व्यवस्था की जा रही है, ताकि ग्रामीणों को स्वस्थ व स्वच्छ वातावरण उपलब्ध करवाया जा सके।

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