लखीसराय संग्रहालय में सजेगी ‘बिहार की सिनेयात्रा’

डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह व डॉ. राजकिशोरी सिंह को मरणोपरांत लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान

लखीसराय(सरफराज आलम)कला, संस्कृति और सिनेमा को समर्पित संस्था सिनेयात्रा के तत्वावधान में 21 से 23 फरवरी 2026 तक लखीसराय संग्रहालय में तीन दिवसीय कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा – रजतपट की विरासत” आयोजित होगा। आयोजन के दौरान बिहार की अपनी भाषाओं में बनी पहली फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा और उनके निर्माण से जुड़ी रोचक जानकारियां साझा की जाएंगी।

कार्यक्रम में 22 फरवरी 1963 को प्रदर्शित पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ाईबो की विशेष चर्चा और प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही पहली मगही फिल्म भैइया तथा पहली मैथिली फिल्म ममता गावैय गीत भी दर्शकों को दिखाई जाएगी। सिनेयात्रा के संस्थापक सचिव, फिल्मकार व इतिहासकार रविराज पटेल इन फिल्मों से जुड़े निर्माण प्रसंग और संघर्ष की दास्तानें साझा करेंगे।

आयोजन के दौरान कला संस्कृति पदाधिकारी सह संग्रहालय के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष मृणाल रंजन द्वारा संगीत प्रस्तुति दी जाएगी। उद्घाटन सत्र के पश्चात लखीसराय के प्रतिष्ठित चिकित्सक व समाजसेवी स्वर्गीय डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी डॉ. राजकिशोरी सिंह को मरणोपरांत “सिनेयात्रा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026” से सम्मानित किया जाएगा। सम्मान स्वरूप इक्कीस हजार रुपये का चेक, स्मृति पत्र, स्मृति चिह्न व शॉल प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सिनेयात्रा के संस्थापक अध्यक्ष आर.एन. दास करेंगे, जबकि स्वागताध्यक्ष जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र होंगे। आयोजकों के अनुसार, बिहार फिल्म जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति की संभावना है। यह आयोजन राज्य की समृद्ध सिनेमाई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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