चीन में लैब बंदरों की कीमत आसमान पर, एक बंदर की कीमत औसत सालाना सैलरी से भी ज्यादा

बीजिंग, 18 फरवरी 2026: चीन में ड्रग रिसर्च और बायोटेक इंडस्ट्री के तेज़ी से विस्तार के कारण लैब में इस्तेमाल होने वाले बंदरों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक लैब मंकी की कीमत अब करीब 140,000 युआन यानी लगभग 18 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जो चीन की औसत सालाना आय से भी अधिक है।

बायोटेक बूम से बढ़ी मांग

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में बायोटेक सेक्टर के तेजी से बढ़ने और नई दवाओं के विकास में तेजी आने से रिसर्च के लिए बंदरों की मांग काफी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रग टेस्टिंग के लिए बंदरों की जरूरत कोविड-19 महामारी के दौरान के स्तर तक पहुंच गई है। इसके अलावा, चीनी बायोटेक कंपनियों और वैश्विक फार्मास्यूटिकल कंपनियों के बीच बढ़ते ड्रग-लाइसेंसिंग समझौते भी मांग में वृद्धि का एक बड़ा कारण हैं।

दवा परीक्षण में क्यों जरूरी होते हैं बंदर

वैज्ञानिकों के अनुसार, बंदरों का उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि कोई दवा मानव शरीर में कितनी सुरक्षित है और वह शरीर में कैसे अवशोषित, टूटती और बाहर निकलती है। विशेष रूप से एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स जैसी जटिल दवाओं के परीक्षण में बंदरों का व्यापक उपयोग किया जाता है।

हर दवा के लिए दर्जनों बंदरों की जरूरत

विशेषज्ञों के मुताबिक—

एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स के परीक्षण के लिए प्रति दवा 70 से 100 बंदरों की जरूरत होती है।

कम जोखिम वाली साधारण दवाओं के लिए 40 से 60 जानवरों का उपयोग किया जाता है।

कुछ मामलों में छोटे मॉलिक्यूल वाली दवाओं के परीक्षण में बंदरों की जगह कुत्तों का भी इस्तेमाल किया जाता है।

पांच साल में दोगुनी हुई कीमत

सरकारी खरीद के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में प्रयोगशाला बंदरों की कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है। यह बंदर प्रीक्लिनिकल स्टेज में दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता जांचने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सप्लाई से ज्यादा है मांग

विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2025 से 2027 के बीच चीन में हर साल लगभग 49,000 से 52,400 प्रयोगशाला बंदरों की आपूर्ति होगी, जबकि मांग 51,300 से 62,600 तक पहुंच सकती है। इस अंतर के कारण आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बायोटेक इंडस्ट्री के तेजी से विस्तार के साथ प्रयोगशाला बंदरों की मांग और कीमत दोनों में वृद्धि जारी रह सकती है, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और दवा विकास की लागत पर भी असर पड़ेगा।

 

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