यूपी के नक्शे-कदम पर बिहार,बैन के बाद भी लखीसराय में खुलेआम बिक रहा मांस-मछली
सरकारी आदेश के बावजूद कई इलाकों में जारी खुली बिक्री,कागज़ों में प्रतिबंध,जमीनी हकीकत अलग
लखीसराय(सरफराज आलम)बिहार सरकार द्वारा यूपी मॉडल को अपनाते हुए खुले में मांस बिक्री पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद जिले में इसका असर जमीनी स्तर पर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है। सोमवार को विधान परिषद में राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि राज्यभर में खुले में मांस बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है तथा मांस विक्रेताओं के लिए वैध लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और शहरी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना है।इसके उलट लखीसराय जिले के कई इलाकों में अब भी खुले में मांस बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। शहर के बड़ी दरगाह के पास, मछलहट्टा क्षेत्र, पंजाबी मुहल्ला जाने वाली सड़क पर रेलवे कोर्ट के समीप, लोहरपट्टी, वी-बाजार मॉल के सामने तथा विद्यापीठ चौक सहित विभिन्न स्थानों पर बिना ढंके और खुले वातावरण में मांस बिकता देखा जा रहा है।
बिहार से पहले उत्तर प्रदेश में भी खुले में मांस बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू हैं। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार किसी भी दुकान पर मांस को खुले में प्रदर्शित करना या लटकाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। दुकानदारों के लिए दुकान के सामने काला शीशा या गहरा पर्दा लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि बाहर से गुजरने वाले राहगीरों को मांस दिखाई न दे। लगातार उठते सवालों के बीच अब बिहार में भी इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की कवायद तेज हुई है।
पूर्व में जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र ने भी जिले के मांस-मछली विक्रेताओं को खुले में बिक्री नहीं करने को लेकर चेतावनी जारी की थी, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर आदेश का असर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खुले में मांस-मछली की बिक्री से स्वच्छता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, दुर्गंध फैलती है तथा संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन से नियमों का सख्ती से पालन कराने, लाइसेंस की नियमित जांच सुनिश्चित करने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि सरकार के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
अब देखना यह होगा कि लखीसराय जिला प्रशासन सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस को जमीनी स्तर पर कब तक प्रभावी ढंग से लागू करवा पाता है।
