बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान मंगलवार को बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। उनके सत्ता संभालने के साथ ही भारत और बांग्लादेश के संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद जताई जा रही है। चुनाव जीतने के बाद अपने शुरुआती बयानों में रहमान ने भारत, चीन और पाकिस्तान के साथ संतुलित विदेश नीति अपनाने की वकालत की है।
अंतरिम सरकार का अंत, मुहम्मद यूनुस ने दिया इस्तीफा
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने नई सरकार को सत्ता सौंपने से पहले इस्तीफा दे दिया। अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने नेपाल, भूटान और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (सेवन सिस्टर्स) के साथ समुद्री और आर्थिक संपर्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
हालांकि, उन्होंने भारत का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, जिसे विशेषज्ञ एक कूटनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान क्षेत्रीय आर्थिक ढांचे में बांग्लादेश की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा था।
भारत ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ
भारत ने बांग्लादेश की नई सरकार का स्वागत करते हुए सकारात्मक संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी और भारत की ओर से सहयोग जारी रखने का भरोसा जताया है।
वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए ढाका भेजा जा रहा है। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिसरी और लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह के भी शामिल होने की संभावना है।
पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स में होगा शपथ ग्रहण समारोह
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन शाम 4 बजे तारिक रहमान और उनकी कैबिनेट को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
इस बार परंपरा से हटकर शपथ ग्रहण समारोह बंगभवन के बजाय जातीय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। समारोह में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू और तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में नई सरकार के आने से भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।
व्यापार और कनेक्टिविटी को और मजबूत करने का मौका मिलेगा
सीमा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ सकता है
उत्तर-पूर्व भारत के साथ क्षेत्रीय आर्थिक संपर्क मजबूत हो सकता है
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत के लिए रणनीतिक संतुलन बनाए रखना आसान होगा
भारत को उम्मीद है कि नई सरकार आपसी विश्वास और सहयोग को प्राथमिकता देगी, जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे।
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