जैसे महाभारत में कृष्ण ने द्रौपदी को बचाया था, वैसे ही जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा के नेताओं के कथित शोषण से अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए आगे आए हैं।

गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

महाभारत काल में जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, तब भगवान कृष्ण उनकी रक्षा के लिए आगे आए थे। उसी संदर्भ का उल्लेख करते हुए वर्तमान समय (कलयुग) में न्यायमूर्ति सूर्यकांत को अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए आगे आने वाला बताया जा रहा है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि अरावली एक समग्र पर्वत श्रृंखला है, जिसकी न तो शुरुआत हरियाणा से होती है और न ही अंत। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अरावली की स्पष्ट परिभाषा तय नहीं होती, तब तक इस क्षेत्र में किसी भी परियोजना की अनुमति देने का कोई आधार नहीं बनता।

इसी संदर्भ में भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी अरावली जू सफारी परियोजना, जो गुरुग्राम में प्रस्तावित थी, पर फिलहाल रोक लगा दी है। हरियाणा के सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी और इस मामले में याचिकाकर्ता रहे आर. के. शर्मा ने पहले ही आशंका जताई थी कि यह परियोजना सर्वोच्च न्यायालय की कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतर पाएगी।

इससे पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा अंबियंस इंफ्रास्ट्रक्चर, गुरुग्राम से जुड़े मामले को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को उस योजना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसकी परिकल्पना पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में की गई थी। साथ ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह, जो इस परियोजना के पक्ष में लगातार पैरवी कर रहे थे, उन्हें भी इस निर्णय से झटका लगा है।

उल्लेखनीय है कि राव नरबीर सिंह ने गैरतपुर गांव में एक रिसॉर्ट के लिए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) प्राप्त किया था, जो प्रस्तावित जू सफारी परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे अरावली क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण और पर्यावरणीय क्षति पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

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