“जनता पूछ रही है — जो देश की रक्षा करें, उनकी रक्षा कौन करेगा?”

पुलिस परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर छात्रों की हुंकार, आंदोलन का संकेत

गाजियाबाद/लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी प्रतिदिन अपने प्राणों की परवाह किए बिना कानून-व्यवस्था एवं जनसुरक्षा के लिए डटे रहते हैं। त्योहार हो या आपदा, दिन हो या रात — पुलिस हर परिस्थिति में समाज की ढाल बनकर खड़ी रहती है। ऐसे में अब एक अहम सवाल उठ रहा है कि यदि पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तो यह अन्याय कब तक चलता रहेगा?

पुलिस कर्मियों एवं उनके परिजनों के लिए सुदृढ़ स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर निर्वाण फाउंडेशन द्वारा पुलिस महानिदेशक तक ज्ञापन पहुंचाए जाने के बाद यह मुद्दा अब जनसमर्थन प्राप्त करने लगा है। इसी क्रम में प्रिंस गुज्जर एवं अमन शर्मा के नेतृत्व में अनेक जागरूक छात्रों ने सामूहिक रूप से समर्थन पत्र निर्वाण फाउंडेशन के संस्थापक श्री ईश्वर चंद्र को सौंपा।

छात्रों ने स्पष्ट कहा कि यह केवल समर्थन पत्र नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प है। इस अवसर पर प्रिंस गुज्जर ने कहा, “पुलिस कर्मी समाज की सुरक्षा की नींव हैं। यदि उनके परिवार स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहेंगे तो यह पूरे समाज की असंवेदनशीलता होगी। हम इस जनहित मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएंगे और युवाओं को इस अभियान से जोड़ेंगे।”

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने एक स्वर में नारे लगाए —
“स्वस्थ पुलिस – सुरक्षित समाज!”
“जो हमारी रक्षा में खड़े हैं, उनकी सुरक्षा भी हमारा धर्म है!”

छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र एवं ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापक हस्ताक्षर अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम और लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

निर्वाण फाउंडेशन के संस्थापक श्री ईश्वर चंद्र ने कहा कि यह संघर्ष किसी टकराव का नहीं, बल्कि व्यवस्था को सशक्त और मानवीय बनाने का प्रयास है। पुलिस परिवारों को सम्मानजनक और प्रभावी स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना केवल सुविधा नहीं, बल्कि नैतिक और प्रशासनिक उत्तरदायित्व है।

अब जनता का प्रश्न सीधा है — जो देश और समाज की रक्षा करते हैं, क्या उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सबकी नहीं है?
यह आवाज अब थमने वाली नहीं दिख रही।

 

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