भारत–अमेरिका प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था पर उठे सवाल: किसान–मछुआरा–पशुपालक समुदाय ने जताई चिंता, सरकार से मांगे स्पष्ट जवाब
नोएडा: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित टैरिफ एवं व्यापार व्यवस्था को लेकर देश में किसान, मछुआरा और पशुपालक समुदाय के बीच चिंता गहराती जा रही है। भारतीय हलधर किसान यूनियन ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य संप्रभुता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब की मांग की है।
यूनियन के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय कोर कमेटी उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार गिरि ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर धीरेन्द्र सिंह सोलंकी और राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री सुधीर सिंह राघव के साथ दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक एक विस्तृत ऑनलाइन बैठक की। बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि प्रस्तावित टैरिफ संरचना, यदि असमान (जैसे 18% बनाम 0%) रही, तो इसका सीधा असर कृषि, मत्स्य, डेयरी, पशुपालन और खाद्य-प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा।
डॉ. गिरि ने कहा कि भारत का मछुआरा समुदाय—चाहे समुद्री हो या अंतर्देशीय—पहले से लागत, बाजार अस्थिरता और आय सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में विदेशी उत्पादों को अनुचित टैरिफ लाभ देकर भारतीय उत्पादकों को असमान प्रतिस्पर्धा में धकेलना संविधान की भावना के विपरीत होगा।
उन्होंने कहा, “कृषि, मछुआरा और पशुपालन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में इनकी अनदेखी की गई तो यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि संवैधानिक संकट का विषय होगा।”
सरकार से उठाए गए संवैधानिक और कानूनी प्रश्न
भारतीय हलधर किसान यूनियन ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित मुद्दों पर लिखित और सार्वजनिक जवाब मांगे हैं—
क्या प्रस्तावित समझौते में संविधान के अनुच्छेद 38, 39(b), 39(c), 43, 47 और 48 के प्रावधानों का परीक्षण किया गया है?
कृषि और मत्स्य राज्य सूची के विषय होने के बावजूद क्या राज्यों और तटीय राज्यों से औपचारिक परामर्श लिया गया?
क्या MSP, मछली न्यूनतम मूल्य और दुग्ध व पशुधन मूल्य पर प्रभाव अध्ययन (Impact Assessment) कराया गया? यदि हां, तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं है?
भारत–अमेरिका वार्ताओं की तिथियां, एजेंडा, कार्यवृत्त और ड्राफ्ट प्रस्ताव सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?
क्या इस प्रस्तावित व्यवस्था को संसद में बहस के लिए लाया जाएगा?
क्या यह समझौता WTO के विशेष और भेदभावपूर्ण प्रावधानों (Special and Differential Treatment) के अनुरूप है?
आंदोलन की चेतावनी
डॉ. शैलेश कुमार गिरि ने कहा कि यदि भविष्य में यह प्रमाणित हुआ कि प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था से किसान, मछुआरा या पशुपालक समुदाय प्रभावित हुआ, तो देशभर में लोकतांत्रिक और संवैधानिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत और अन्नदाता के हितों की रक्षा के लिए होगा।
यूनियन की प्रमुख मांगें
सभी प्रस्तावित टैरिफ समझौतों को सार्वजनिक किया जाए।
संसद में विस्तृत बहस कराई जाए।
किसान, मछुआरा और पशुपालक संगठनों से औपचारिक विमर्श किया जाए।
MSP, मत्स्य मूल्य संरक्षण और ग्रामीण बाजार संरचना से कोई समझौता न किया जाए।
भारतीय हलधर किसान यूनियन का कहना है कि सरकार की मौजूदा चुप्पी आशंकाओं को जन्म दे रही है। ऐसे में पारदर्शिता और संवाद ही इस संवेदनशील मुद्दे का एकमात्र समाधान हो सकता है।
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