चंडीगढ़ – हरियाणा में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की हड़ताल समाप्त हो गई है। मंगलवार को प्रदेश की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा के साथ हुई बैठक के बाद रेवेन्यू अधिकारियों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। इसके तहत बुधवार से प्रदेश की सभी तहसीलों में कामकाज दोबारा शुरू हो जाएगा।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपनी चार मांगों को लेकर 5 फरवरी से हड़ताल पर थे, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। हड़ताल लंबी खिंचने के कारण मंगलवार तक करीब 12 हजार रजिस्ट्रियां लंबित हो गई थीं। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने 9 फरवरी से रजिस्ट्री का कार्य डीआरओ और एसडीएम को सौंप दिया था, लेकिन इसके बावजूद सोमवार को पूरे प्रदेश में केवल 28 रजिस्ट्रियां ही हो सकीं। इससे सरकार को राजस्व नुकसान भी उठाना पड़ा।
मंगलवार को रेवेन्यू ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने वित्त आयुक्त के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में चारों मांगों पर सहमति बनी और सरकार ने इन पर अमल के लिए 15 दिन का समय मांगा, जिसे अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया। तय हुआ कि इस अवधि में सरकार मांगों पर मंथन करेगी और दो सप्ताह बाद दोबारा बैठक होगी।
बैठक में यह आश्वासन भी दिया गया कि रेवेन्यू अधिकारियों की समस्याओं के समाधान और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक अंतर-विभागीय समिति (इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी) का गठन किया जाएगा। सकारात्मक संकेत मिलने और जनता को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने कामकाज बाधित न करने का निर्णय लिया।
वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बैठक के दौरान रेवेन्यू अधिकारियों को प्रशासन की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि कई विभागों की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर रेवेन्यू विभाग पर निर्भर करती है। उन्होंने माना कि बढ़ते कार्यभार और जनता की अपेक्षाओं के कारण अधिकारियों पर दबाव रहता है, जिससे कभी-कभी गलत धारणाएं भी बन जाती हैं। डॉ. मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अधिकारियों की सभी चिंताओं पर कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत निष्पक्ष और सहानुभूतिपूर्ण विचार किया जाएगा।
