उत्तर प्रदेश पुलिस परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर उठी जनहित की आवाज़
निर्वाण फाउंडेशन ने पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को सौंपे महत्वपूर्ण सुझावनिर्वाण फाउंडेशन ने पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को सौंपे महत्वपूर्ण सुझाव
मोदीनगर। उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवा के साथ-साथ उनके परिवारजनों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण जनहित की पहल सामने आई है। प्रसिद्ध सामाजिक संस्था निर्वाण फाउंडेशन द्वारा इस विषय को गंभीरता से उठाते हुए पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को एक सुझाव-पत्र प्रेषित किया गया है।
निर्वाण फाउंडेशन के संस्थापक ईश्वर ने शहीद मेजर आशाराम त्यागी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य कर कानून-व्यवस्था एवं जनसुरक्षा का दायित्व निभा रहे हैं। हालांकि, इस कठिन सेवा का सबसे बड़ा मानसिक और सामाजिक भार उनके परिवारजनों को उठाना पड़ता है, जिन्हें लगातार तनाव, असुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इसी गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए निर्वाण फाउंडेशन द्वारा पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को जनहितकारी एवं नीतिगत सुझाव-पत्र ई-मेल तथा उत्तर प्रदेश सरकार की जनसुनवाई प्रणाली के माध्यम से विधिवत रूप से भेजा गया है, ताकि इस विषय पर शीघ्र संज्ञान लेकर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
अपने सुझाव-पत्र में संस्था ने उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि लगातार लंबी एवं अनियमित ड्यूटी, अत्यधिक मानसिक दबाव, पर्याप्त विश्राम के अभाव तथा समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अवसाद एवं मानसिक तनाव जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके परिवारों के जीवन पर भी पड़ रहा है।
निर्वाण फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि यह कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के सामूहिक कल्याण से जुड़ा हुआ जनहित का विषय है।
संस्था द्वारा प्रस्तुत सुझाव-पत्र में प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं को शामिल किया गया है—
• पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नियमित एवं अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था।
• पुलिस कर्मियों एवं उनके परिवारजनों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधा अथवा प्राथमिकता प्रणाली।
• मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, तनाव प्रबंधन एवं काउंसलिंग की समुचित व्यवस्था।
• अत्यधिक लंबी ड्यूटी के बाद अनिवार्य विश्राम अवधि सुनिश्चित करना।
• गंभीर बीमारी की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी उपचार हेतु स्पष्ट विभागीय दिशानिर्देश।
निर्वाण फाउंडेशन का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव न केवल पुलिस कर्मियों एवं उनके परिवारों पर पड़ेगा, बल्कि विभागीय कार्यक्षमता तथा समाज की समग्र सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होगी।
संस्था ने पुलिस कर्मियों के परिवारजनों एवं समाज के जागरूक नागरिकों से भी इस मानवीय विषय पर एकजुट होने की अपील की है, ताकि पुलिस बल के स्वास्थ्य एवं जीवन-सुरक्षा से जुड़ी यह आवाज़ प्रभावी रूप से शासन-प्रशासन तक पहुँच सके।
