सुना है कि कोई फाइल खुली है अमरीका में!

गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल 

हमारे जागरूक पाठक सुनीत मुखर्जी के सौजन्य से मूरखजी, मूरखजी, कहाँ हो?

अरे क्या बात है बंगाली, क्यों हैरान-परेशान है?

सुना है कि कोई फाइल खुली है अमेरिका में!

अरे बावले, अमेरिका में तो फाइलें खुलती ही रहती हैं और इंडिया में सीडी… हा-हा। बता, तेरी क्या दिक्कत है?

सुना है कि महामानव जी का यहूदियों के मुल्क में नाचने का ज़िक्र है!

तो फिर क्या हो गया? कोई धरती पर बिजली पड़ गई?

पर वो तो देश के प्रधान हैं, वो कैसे नाच सकते हैं?

अरे बावली बूच, याद कर दादा लख्मी को, याद कर—क्या कह गया था सूर्य कवि लख्मीचंद।

क्या कह गए थे दादा लख्मी?

“लाख चौरासी जीया जून मैं नाचै दुनिया सारी,
नाचण मैं के दोष बता या अकल की हुशियारी।

सब तै पहलम विष्णु नाच्या पृथ्वी ऊपर आकै,
फिर दूजे भस्मासुर नाच्या सारा नाच नचा कै।
गौरां आगै शिवजी नाच्या ल्या पार्वती नै ब्याह कै,
जल के ऊपर ब्रह्मा नाच्या कमल फूल के म्हा कै।
ब्रह्मा जी नै नाच-नाच कै रची सृष्टि सारी।

गोपनियां मैं कृष्ण नाच्या करकै भेष जनाना,
विराट देश मैं अर्जुन नाच्या करया नाचना-गाना।
इन्द्रपुरी मैं इन्द्र नाचै जब हो मींह बरसाणा,
गढ़ माण्डव मैं मलके नाच्या करया नटां का बाणा।
मलके नै भी नाच-नाच कै ब्याहल्यी राजदुलारी।

पवन चलै जब दरख़्त नाचैं, पेड़-पात हालैं सैं,
लोरी दे-दे माता नाचैं, बच्चे नै पाळैं सैं।
रण के म्हां तलवार नाचती किसे हाथ चालैं सैं,
सिर के ऊपर काल नाचता नहीं घाट घालै सै।
कालबली नै नाच खा लिए ऋषि-मुनि-ब्रह्मचारी।

बण मैं केहरी शेर नाचता और नाचे सै हाथी,
रीछ और बंदर दोनों नाचैं खोल दिखावैं छाती।
गितवाड़े मैं मोर नाचता कैसी फांख फर्राती,
ब्याह-शादी मैं घोड़ी नाचैं जिस पै सजैं बराती।
दूर-दराज़ कबूतर नाचैं लगैं घुटरगूं प्यारी।

दीपचंद खाण्डे मैं नाच्या सदाव्रत खुलवाग्या,
बाजे नाई नाच-नाच कै और भी भक्त कुहाग्या।
हावेली मैं नत्थू ब्राह्मण मंदिर नया चिणाग्या,
‘लख्मीचंद’ भी नाच-नाच कै नाम जगत मैं पाग्या।
इसे-इसे भी नाच लिए तै कौण हकीकत म्हारी।”**

मूरखजी ठुमकते हुए निकल गए।
और मैं हतप्रभ खड़ा रह गया।

दूर से मूरखजी की आवाज़ गूँज रही थी—
“डीजे वाले बाबू, ज़रा गाना चला दे, गाना चला दे,
डोलांड भाई को ठुमका दिखा दे, ठुमका दिखा दे।”

“मूरखजी की मसखरी”
(किस्सा: डांस पे चांस)

January 31, 2026

 

khabre junction

4 Comments
  1. Rajinder krishan sharma says

    Mukhejee & moorkhji samvad excellent .
    Pandit Lakhmi chand,an uneducated entity ,was a great visionary from Haryana. His songs created literary works on social emancipation .he was a man of. Extraordinary farsighted vision . Great reflections in this blog. Congrats.

  2. Dr Subhan Khan Chharora says

    Wah Pawan Kumar Bansal je for commenting on Mukherjee and putting a wonderful haryanvi song ,it is really your valuable contribution, congratulations -Dr Subhan Khan Chharora

    1. Khabre Junction says

      thank you

  3. Nilda Kisinger says

    Wohh just what I was searching for, regards for posting.

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