अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत लागू की गई नई आपराधिक प्रक्रिया संहिता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गंभीर चिंता बढ़ा दी है। इस कानून की वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा हो रही है, क्योंकि इसे मानवाधिकारों और लैंगिक समानता के खिलाफ बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नियम अफगान समाज में विभाजन और दमन को और गहरा कर रहे हैं।
सामाजिक हैसियत के आधार पर सजा
तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा लागू की गई इस नई संहिता में एक ही अपराध के लिए सजा अपराधी की सामाजिक स्थिति पर निर्भर करती है। कानून के अनुच्छेद 9 के तहत अफगान समाज को चार वर्गों में विभाजित किया गया है, जिनके लिए अलग-अलग दंड का प्रावधान है।
इस्लामी विद्वान (उलेमा/मौलवी): इन्हें केवल मौखिक या टेलीफोनिक सलाह दी जाती है, न मुकदमा चलता है और न ही कठोर सजा दी जाती है।
अभिजात वर्ग (रसूखदार/एलीट): इन्हें अदालत में बुलाकर केवल चेतावनी या सलाह दी जाती है।
मध्यम वर्ग: इस वर्ग के लोगों को जेल की सजा दी जा सकती है।
निम्न वर्ग: इन्हें जेल के साथ-साथ कोड़े मारने जैसी शारीरिक सजा भी दी जा सकती है।
मानवाधिकार संगठनों ने इस व्यवस्था को असमान न्याय और आधुनिक गुलामी को वैध ठहराने जैसा बताया है। उनका कहना है कि यह कानून के समक्ष समानता के मूल सिद्धांत का खुला उल्लंघन है।
महिलाओं पर बढ़ते प्रतिबंध
तालिबान शासन के तहत महिलाओं की स्वतंत्रता पहले ही सीमित थी, लेकिन हालिया आदेशों ने हालात और कठोर बना दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे फरमान जारी किए गए हैं, जो महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से लगभग पूरी तरह बाहर कर देते हैं।
महिलाओं की आवाज पर पाबंदी: सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के जोर से बोलने, गाने, प्रार्थना करने या कुरान पढ़ने पर रोक है।
तस्वीरों और वीडियो पर प्रतिबंध: नैतिकता मंत्रालय ने मीडिया और विज्ञापनों में इंसानों व जानवरों की तस्वीरों और वीडियो के प्रसारण पर रोक लगा दी है।
घरों की खिड़कियां ढकने का आदेश: कई इलाकों में घरों की खिड़कियों को काले रंग से पोतने या मोटे पर्दों से ढकने का निर्देश दिया गया है।
महरम के बिना इलाज पर रोक: बिना पुरुष रिश्तेदार के महिलाओं के इलाज पर पाबंदी लगाई गई है।
पुरुषों के बाल और दाढ़ी पर सख्ती: पश्चिमी हेयरकट या दाढ़ी ट्रिम कराने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
महिलाओं का सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश प्रतिबंधित: पार्क, जिम, मनोरंजन केंद्र और सार्वजनिक स्नानघर महिलाओं के लिए बंद कर दिए गए हैं।
संगीत और शोर पर रोक: सार्वजनिक वाहनों और समारोहों में संगीत बजाना अपराध घोषित किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी
मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ये नियम तालिबान की कठोर व्याख्या पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं और कमजोर वर्गों को सामाजिक जीवन से पूरी तरह अलग करना है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अफगानिस्तान में बढ़ते दमन पर चिंता जताते हुए इन कानूनों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
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