ईडीसी बढ़ोतरी से आम आदमी के घर का सपना और दूर हुआ: कुमारी सैलजा
– पिछले कुछ वर्षों में कलेक्टर दर, बिजली दरें, स्टाम्प शुल्क और अब ईडीसी में की गई वृद्धि – वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार की गरीब आवास योजनाओं पर नहीं हुआ काम
ऐलनाबाद, हरियाणा, 17 जनवरी (एम. पी. भार्गव)।सिरसा से सांसद, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार द्वारा बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) में 10 प्रतिशत वृद्धि किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश में मकान और प्लॉट खरीदना आम आदमी, गरीब और मध्यम वर्ग के लिए और अधिक कठिन हो जाएगा।
कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 तक सभी को पक्का मकान देने का जो वादा किया गया था, मौजूदा सरकारी नीतियां उस लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत दिशा में जाती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाया गया है। पहले कलेक्टर दरें बढ़ाई गईं, फिर बिजली दरें, उसके बाद स्टाम्प शुल्क और अब ईडीसी में वृद्धि कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि ईडीसी का भुगतान बिल्डर करते हैं, क्योंकि व्यवहार में इसका पूरा बोझ फ्लैट और प्लॉट खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर ही डाला जाता है। इसका सीधा असर मकानों की कीमतों पर पड़ता है और मध्यम वर्ग का घर खरीदने का सपना लगातार दूर होता जा रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि दीनदयाल योजना सहित गरीबों के लिए शुरू की गई कई आवासीय योजनाएं या तो बंद कर दी गई हैं या उन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। पहले “नो प्रॉफिट–नो लॉस” के आधार पर गरीबों को प्लॉट और मकान उपलब्ध कराने की व्यवस्था थी, जो अब लगभग समाप्त हो चुकी है। इसके स्थान पर सरकार ने आम जनता को निजी बिल्डरों पर निर्भर कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि सिरसा सहित हरियाणा के अनेक शहरों में वर्ष 2013 में कांग्रेस की केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के लिए आवास निर्माण की परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं और इसके लिए धनराशि भी जारी की गई थी, लेकिन उन परियोजनाओं को या तो रद्द कर दिया गया या वर्षों तक लंबित रखा गया। सिरसा संसदीय क्षेत्र में गरीबों के लिए प्रस्तावित मकान आज तक जमीन पर नहीं उतर पाए, जो यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार ने कभी गरीबों के आवास को प्राथमिकता नहीं दी।
कुमारी सैलजा ने सरकार से सवाल किया कि विकास शुल्क बढ़ाने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सड़कों, पानी, सीवर और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में वास्तव में कितना सुधार हुआ है। केवल शुल्क बढ़ाकर विकास का दावा करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि ईडीसी बढ़ोतरी के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और गरीब व मध्यम वर्ग के लिए सस्ती आवास योजनाओं को दोबारा प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
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