खराब पोस्चर नहीं, ये हैं स्कोलियोसिस के असली कारण: जानिए डॉक्टर की राय

आज के समय में स्कोलियोसिस (Scoliosis) की समस्या कई लोगों में देखी जा रही है। आमतौर पर यह माना जाता है कि लगातार झुककर बैठना, भारी बैग उठाना या गलत पोस्चर में काम करना ही रीढ़ की हड्डी के टेढ़े होने की वजह बनता है। लेकिन क्या वाकई खराब पोस्चर से स्कोलियोसिस होता है? इस बारे में एस्थेटिक्स एंड वेलनेस के चिकित्सा निदेशक डॉ. प्रखर पचौली ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

स्कोलियोसिस क्या है?

डॉ. प्रखर पचौली के अनुसार, स्कोलियोसिस रीढ़ की हड्डी की वह स्थिति है, जिसमें रीढ़ दाईं या बाईं ओर झुक जाती है और उसमें हल्का घुमाव (Rotation) भी आ जाता है। सामान्य तौर पर रीढ़ में आगे-पीछे का हल्का झुकाव (Lordosis और Kyphosis) प्राकृतिक होता है, लेकिन स्कोलियोसिस में यह झुकाव साइड में होता है। इसके कारण शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और देखने में एक कंधा ऊंचा या कमर का एक हिस्सा ज्यादा मुड़ा हुआ दिखाई देने लगता है।

क्या खराब पोस्चर से स्कोलियोसिस होता है?

डॉक्टर बताते हैं कि खराब पोस्चर से True Scoliosis विकसित नहीं होता। गलत मुद्रा के कारण कई बार Functional या Postural Curvature दिखाई देती है। इसमें खड़े होने या झुककर बैठने पर रीढ़ टेढ़ी लगती है, लेकिन जैसे ही व्यक्ति सीधा लेटता है, रीढ़ सामान्य हो जाती है। इसे ‘झूठा स्कोलियोसिस’ भी कहा जाता है, जिसे एक्स-रे से आसानी से पहचाना जा सकता है।

स्कोलियोसिस के प्रमुख प्रकार और कारण

डॉक्टरों के अनुसार स्कोलियोसिस के कई प्रकार होते हैं—

Idiopathic Scoliosis – सबसे आम प्रकार, जो अधिकतर किशोरावस्था में होता है, इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चलता।

Congenital Scoliosis – जन्म के समय रीढ़ की हड्डी के विकास में गड़बड़ी के कारण।

Neuromuscular Scoliosis – सेरेब्रल पाल्सी या मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी बीमारियों में, जब मांसपेशियों और नसों का तालमेल बिगड़ जाता है।

Degenerative Scoliosis – उम्र बढ़ने के साथ डिस्क घिसने और हड्डियों की संरचना में बदलाव से।

खराब पोस्चर से होने वाले नुकसान

हालांकि गलत पोस्चर सीधे स्कोलियोसिस का कारण नहीं बनता, लेकिन इससे रीढ़ से जुड़ी कई कार्यात्मक समस्याएं बढ़ सकती हैं, जैसे—

पीठ और गर्दन में दर्द

कंधों की असमान स्थिति

रीढ़ के आसपास मांसपेशियों में जकड़न

जल्दी थकान और अकड़न

स्कोलियोसिस के लक्षण

स्कोलियोसिस के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं—

एक कंधा दूसरे से ऊंचा दिखना

कमर का आकार असमान लगना

कपड़ों का टेढ़ा फिट होना

आगे झुकने पर एक तरफ की पसलियां उभरी हुई दिखना

ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

इलाज के तरीके

स्कोलियोसिस का इलाज उसकी गंभीरता और मरीज की उम्र पर निर्भर करता है—

हल्के मामलों में: नियमित निगरानी और जांच

बढ़ते बच्चों में: ब्रेसेज़ (Brace Therapy)

गंभीर मामलों में: सर्जरी (Spinal Fusion)
इसके साथ योग, फिजियोथेरेपी और बैक-स्ट्रेंथ एक्सरसाइज भी सहायक होती हैं।

बचाव ही सबसे बेहतर उपाय

भले ही खराब पोस्चर स्कोलियोसिस का मुख्य कारण न हो, लेकिन रीढ़ की सेहत के लिए सही मुद्रा बेहद जरूरी है।
दैनिक जीवन में इन बातों का ध्यान रखें—

मोबाइल और कंप्यूटर देखते समय सही पोस्चर अपनाएं

लंबे समय तक बैठने के बीच स्ट्रेच करें

बच्चों के बैग का वजन संतुलित रखें

कोर और बैक मसल्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करें

विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान, सही जानकारी और स्वस्थ आदतों से स्कोलियोसिस की जटिलताओं से बचा जा सकता है।

 

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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें

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