ट्रंप की क्यूबा को दो-टूक चेतावनी, डील करो या परिणाम भुगतो

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के संकेतों के बाद अब ट्रंप की सीधी नजर क्यूबा पर टिक गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दिए गए कड़े संदेश में ट्रंप ने क्यूबा सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अब उसे अमेरिका के साथ डील करनी होगी, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला से मिलने वाले तेल और आर्थिक मदद पर निर्भर रहा है और इसके बदले वहां की सरकार को सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध कराता रहा है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में वेनेजुएला में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद अधिकांश क्यूबाई सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब वेनेजुएला से क्यूबा को किसी भी तरह की मदद नहीं भेजी जाएगी।

क्यूबा को लेकर सख्त रुख
ट्रंप का कहना है कि “वेनेजुएला के पास अब दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है” और क्यूबा को बहुत देर होने से पहले समझौता कर लेना चाहिए। उनके इस बयान को अमेरिका की ओर से क्यूबा पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

दुश्मनी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है। 1898 में स्पेन की हार के बाद क्यूबा अमेरिकी संरक्षण में आया। 1902 में स्वतंत्रता के बावजूद प्लैट संशोधन के कारण अमेरिका को क्यूबा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका हमेशा पश्चिमी गोलार्ध में रूस और चीन जैसी शक्तियों के प्रभाव को सीमित करना चाहता रहा है, जबकि क्यूबा के इन देशों से करीबी संबंध अमेरिका के लिए चुनौती रहे हैं।

शीत युद्ध और प्रतिबंधों का दौर
1959 में फिदेल कास्त्रो द्वारा सत्ता संभालने और सोवियत संघ से नजदीकी बढ़ाने के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक और यात्रा प्रतिबंध लगा दिए। क्यूबा मिसाइल संकट ने दुनिया को परमाणु युद्ध के कगार तक पहुंचा दिया था। हालांकि बाद में तनाव कम हुआ, लेकिन दुश्मनी बनी रही।

ओबामा की नरमी, ट्रंप की सख्ती
2014 में बराक ओबामा प्रशासन के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हुआ था। दूतावास खुले और क्यूबा को आतंकवाद समर्थक देशों की सूची से हटाया गया। लेकिन 2017 में ट्रंप के सत्ता में आते ही यह नीति पलट गई। क्यूबा को दोबारा आतंकवाद समर्थक देश घोषित किया गया और संबंधों में फिर तल्खी आ गई।

‘तानाशाही की तिकड़ी’ और मौजूदा हालात
ट्रंप प्रशासन क्यूबा, वेनेजुएला और निकारागुआ को “तानाशाही की तिकड़ी” मानता रहा है। मौजूदा समय में क्यूबा गंभीर आर्थिक संकट, बिजली की कमी और दवाओं के अभाव से जूझ रहा है। बड़ी संख्या में क्यूबाई नागरिक अमेरिका की ओर पलायन कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का आक्रामक रुख क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। अब देखना होगा कि क्यूबा समझौते का रास्ता चुनता है या एक बार फिर टकराव की दिशा में आगे बढ़ता है।

 

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