भारत का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे फरवरी 2026 तक आम जनता के लिए खोलने की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा और 6 लेन का है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अनुसार, यह एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जो राज्य के 12 जिलों—मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज—से होकर गुजरता है।

गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत मेरठ के बिजौली गांव के पास NH-334 से होती है और इसका समापन प्रयागराज के जूदापुर दांडू गांव के पास NH-19 पर होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत लगभग 36,000 से 37,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। निर्माण कार्य 12 पैकेजों में DBFOT मॉडल के तहत कराया गया है। एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इसमें एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे, आधुनिक FASTag आधारित टोल सिस्टम, इमरजेंसी लेन, सर्विस रोड, रेस्ट एरिया, CCTV कैमरे और SOS कॉल बॉक्स जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। कुल 14 टोल प्लाजा बनाए गए हैं, जहां हाल ही में FASTag आधारित टोल सिस्टम का सफल ट्रायल रन पूरा किया गया है। ट्रायल के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी समस्या सामने नहीं आई।

रणनीतिक दृष्टि से भी गंगा एक्सप्रेसवे बेहद महत्वपूर्ण है। शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी बनाई गई है, जहां फाइटर जेट्स की इमरजेंसी लैंडिंग की सुविधा है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप्स विकसित की गई हैं, जिन पर भारतीय वायुसेना द्वारा सफल ट्रायल किया जा चुका है। परियोजना के तहत कुल 1498 बड़े स्ट्रक्चर—पुल, फ्लाईओवर और अंडरपास—निर्मित किए गए हैं, जिनमें से लगभग सभी पूरे हो चुके हैं। गंगा नदी पर बना 960 मीटर लंबा पुल भी तैयार है।

इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी। वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज तक सामान्य मार्गों से यात्रा करने में 10 से 12 घंटे लगते हैं, जबकि गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए यह सफर मात्र 5 से 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे ईंधन की बचत होगी, ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लॉजिस्टिक्स, व्यापार तथा पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

निर्माण कार्य लगभग 95 से 98 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रायल सफल होने के बाद इसे आम जनता के लिए अगले महीने, यानी फरवरी 2026 तक खोलने की तैयारी है। कुछ सूत्रों के मुताबिक जनवरी मध्य या फरवरी तक इसकी डेडलाइन तय की गई है। मुख्य सचिव के निर्देश पर 15 फरवरी 2026 तक परियोजना को हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश को ‘एक्सप्रेस प्रदेश’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित होगी, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।

 

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