जब हरियाणा सीआईडी के अफ़सर ने अपने अधीनस्थ को रोहतक के इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर राजन जेड को सबक़ सिखाने का आदेश दिया

गुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

 

जाको राखे साइंया, मार सके न कोई।यह पुरानी कहावत पत्रकार राजन जेद पर पूरी तरह फिट बैठती है। रोहतक में वे कभी इंडियन एक्सप्रेस के स्टाफर थे। अपनी पत्नी के नाम से पंजाब केसरी में भी खबरें लिखते थे।

1978 में देवीलाल के मुख्यमंत्री रहते पुलिस में बगावत हो गई। बगावती सिपाहियों को सबक सिखाने के लिए रोहतक पुलिस लाइन में सीआईडी के एक अफसर ने सिपाहियों को आमने-सामने खड़ा कर एक-दूसरे को थप्पड़ लगवाए।

राजन जेद का मकान पुलिस लाइन के सामने था, इसलिए उन्होंने अपने घर की छत से पूरा घटनाक्रम देख लिया। इंडियन एक्सप्रेस और पंजाब केसरी अखबार में खबर छपी तो हंगामा मच गया। पुलिस अफसर आग-बबूला हो गए। चंडीगढ़ से किसी अफसर ने फोन पर अपने अधीनस्थों को कहा कि “राजन को सबक सिखाओ।”

उन दिनों मोबाइल नहीं थे, इसलिए राजन बच गए। दरअसल हुआ यह कि करनाल के एक पत्रकार, जिनके टेलीफोन महकमे में काफी संपर्क थे, उन्होंने यह संदेश सुन लिया और राजन के ऑफिस में इसकी सूचना दे दी।

चंडीगढ़ स्थित इंडियन एक्सप्रेस के ऑफिस में स्वर्गीय प्रभाष जोशी ने सीधे अखबार के मालिक रामनाथ गोयनका को संदेश दिया। गोयनका ने प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से बात की। मामला मुख्यमंत्री देवीलाल के संज्ञान में आया। वैसे उन्हें इस पूरी स्कीम की जानकारी नहीं थी। किसी अति-उत्साही पुलिस अफसर ने यह योजना बनाई थी।

मोबाइल न होने के कारण राजन बच गए। एक दिन उन्होंने अमेरिका की संसद में वेद मंत्र पढ़े, तो काफी खुशी हुई।

 

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