छह बार नेट क्लियर करने वाली मोनिका को एचपीएससी ने असिस्टेंट प्रोफ़ेसर टेस्ट में किया फेल

निराश बाप का संदेश “तन्ने हरियाणा में नौकरी नहीं मिले हम तेरी शादी कर रहे है"

गुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

हमारे जागरूक पाठक सतीश मेहरा के सौजन्य से

HPSC के परिणाम से क्षुब्ध होकर जब बाप ने बेटी से कहा कि—
“इब तो घर नै आज्या, तेरा ब्याह कर देंगे, तने हरियाणा में नौकरी नहीं मिले।”

हरियाणा के आखिरी छोर के गांव मोरका का एक छोटा किसान जब अपनी बेटी को घर के चूल्हा-चौके से हटाकर उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजता है, तो उसके दिल और दिमाग में बहुत बड़े सपने होते हैं। दूसरी ओर जब इसी बाप को अपनी बेटी से यह कहना पड़ता है कि—
“घर नै आज्या, बहुत पढ़ ली, इब तेरा ब्याह करांगे।”
तो बहुत ही फ्रस्ट्रेशन में बाप द्वारा कही गई यह बात बेटी को रोने पर मजबूर कर देती है।

रोना भी सही है, क्योंकि बेटी ने 6 बार नेट की परीक्षा पास की है और अंग्रेज़ी में पोस्ट ग्रेजुएट करने तक थ्रूआउट फर्स्ट डिवीजन प्राप्त की है। अब 6 बार नेट क्वालिफाई करने वाली इस बेटी को HPSC द्वारा ली जाने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की मुख्य परीक्षा में फेल कर दिया जाता है, तो बेटी के दिल पर पहाड़ टूट जाता है।

एक ओर घर वाले शादी की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो जाते हैं और दूसरी ओर इतना पढ़ने के बावजूद भी HPSC द्वारा SKT की परीक्षा में 35% का क्राइटेरिया सेट कर फेल कर दिया जाता है। इस प्रकार कमीशन द्वारा नौकरी के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं।

गांव की रहने वाली यह लड़की, जो आजकल HPSC के इस निर्णय के खिलाफ पंचकूला में पिछले एक सप्ताह से धरने पर बैठी हुई है। मोनिका को अभी भी आशा है कि उन्हें HPSC या हरियाणा सरकार या फिर पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा, लेकिन मां-बाप की आशा अब निराशा में बदल चुकी है।

इन सब परिस्थितियों के बीच मोनिका ने HPSC के खिलाफ धरने पर बैठने का निर्णय लिया और गांव से 300 किलोमीटर दूर आकर पंचकूला में धरने पर बैठी है।

मोनिका अपनी शैक्षणिक यात्रा के बारे में बताती है कि उन्होंने प्राइमरी तक की पढ़ाई गांव से की। इसके बाद 10वीं और 12वीं तक की पढ़ाई मीठी गांव से की। उसके बाद ग्रेजुएशन बहल के कॉलेज से पूरी की और अंग्रेज़ी विषय में एमए करने के लिए महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने फर्स्ट क्लास में अंग्रेज़ी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन पास की।

इसके बाद उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और छह बार नेट की परीक्षा पास की। UPPSC द्वारा आयोजित की जाने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा पास की, जिसका साक्षात्कार होना अभी बाकी है। राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित की जाने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की मुख्य परीक्षा पास की, लेकिन साक्षात्कार के बाद मेरिट में नाम न आने पर आउट हो गई।

परीक्षाओं का यह सफर यहीं नहीं रुका। इसके बाद DSSSB की PGT परीक्षा पास की। अब उन्हें आस जगी थी कि हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा 613 अंग्रेज़ी के असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती होगी, तो उनका निश्चित रूप से नंबर लगेगा। लेकिन HPSC ने 613 के मुकाबले सिर्फ 151 उम्मीदवारों को ही पास कर सैकड़ों क्वालिफाइड अभ्यर्थियों के असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के सपनों को चकनाचूर कर दिया।

अपनी पारिवारिक स्थिति बताते हुए मोनिका बहुत गंभीर हो जाती है और कहती है कि उनके परिवार के पास केवल तीन एकड़ भूमि है। पिताजी दूसरे लोगों से तीसरे और चौथे हिस्से की बटाई पर जमीन लेकर परिवार का लालन-पालन और गुजारा करते हैं।

जब पिता को यह पता चला कि हरियाणा में नौकरी लगाने वाली संस्था ने मोनिका के साथ-साथ इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को फेल कर दिया है, तो उनसे रहा नहीं गया और भावुक होकर कहा—
“इब तो घर नै आज्या, तेरा ब्याह कर द्यागें।”

मोनिका फिर भी HPSC के इस परिणाम के खिलाफ पंचकूला में धरने पर बैठी है और उन्हें आशा है कि वह इस लड़ाई को शत-प्रतिशत जीतेंगी और उन्हें न्याय मिलेगा।

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