ठंड में उंगलियां नीली क्यों पड़ जाती हैं? डॉक्टर ने बताई वजह और बचाव के उपाय

ठंड का मौसम जहां एक ओर लोगों को पसंद आता है, वहीं दूसरी ओर यह कई तरह की शारीरिक परेशानियां भी लेकर आता है। सर्दियों में कई लोगों की उंगलियां, खासकर पैरों की उंगलियां, नीली या बैंगनी पड़ने लगती हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है और क्या यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत है।

इस विषय पर जानकारी देते हुए डॉ. सुमोल रत्ना (सहायक प्रोफेसर, चिकित्सा विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) ने बताया कि ठंड के मौसम में शरीर खुद को गर्म रखने के लिए हाथों और पैरों की नसों को सिकोड़ लेता है। इससे उंगलियों तक खून का प्रवाह कम हो जाता है। जब खून कम पहुंचता है, तो ऑक्सीजन की आपूर्ति भी घट जाती है, इसी कारण उंगलियां नीली या बैंगनी नजर आने लगती हैं। डॉक्टर के अनुसार, अधिकांश मामलों में यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है और घबराने की जरूरत नहीं होती।

इन कारणों से भी हो सकती है समस्या
डॉ. रत्ना ने बताया कि कुछ लोगों में यह परेशानी रेनॉड्स फिनॉमेनन के कारण भी हो सकती है। इस स्थिति में ठंड या अधिक तनाव के दौरान उंगलियों में खून का बहाव अचानक बहुत कम हो जाता है। पहले उंगलियां सफेद पड़ती हैं, फिर नीली और कुछ समय बाद लाल हो जाती हैं। यह समस्या महिलाओं, दुबले शरीर वाले लोगों और अत्यधिक ठंडे इलाकों में रहने वालों में ज्यादा देखी जाती है।

इसके अलावा शरीर में खून की कमी यानी कम हीमोग्लोबिन (एनीमिया) होने पर भी पैरों की उंगलियां नीली पड़ सकती हैं। शुगर, थायरॉइड की समस्या, धूम्रपान की आदत और लंबे समय तक ठंड में रहने से भी यह दिक्कत बढ़ सकती है। यदि उंगलियों के नीले पड़ने के साथ तेज दर्द, लंबे समय तक सुन्नपन, सूजन या घाव बनने लगें, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इन बातों का रखें खास ध्यान
इस समस्या से बचाव के लिए सर्दियों में पैरों और हाथों को हमेशा गर्म रखना चाहिए। मोटे और गर्म मोजे पहनें, बहुत ठंडे पानी से पैर न धोएं और ठंडे फर्श पर ज्यादा देर तक न बैठें। नियमित रूप से चलना-फिरना या हल्की एक्सरसाइज करने से खून का संचार बेहतर रहता है।

डॉक्टरों का कहना है कि ठंड में उंगलियों का नीला पड़ना अक्सर खून के सही तरीके से न पहुंच पाने की वजह से होता है। ज्यादातर मामलों में यह गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन अगर यह बार-बार हो या लक्षण बढ़ते जाएं, तो समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

 

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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें

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