एडिलेड। एशेज सीरीज में अंपायर के फैसलों के लिए इस्तेमाल हो रही डीआरएस तकनीक एक बार फिर विवादों में आ गई है। एडिलेड में खेले जा रहे एशेज सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच में स्नीकोमीटर लगातार गलतियां करता नजर आ रहा है, जिससे खिलाड़ियों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है।
तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड की टीम पहले से ही मुश्किल में फंसी हुई है। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी को 371 रन पर समेटने के बाद इंग्लैंड ने दूसरी पारी में दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक 213 रन बनाए, लेकिन इस दौरान उसने 8 विकेट गंवा दिए। इंग्लैंड अभी भी ऑस्ट्रेलिया से 158 रन पीछे है। सीरीज में पहले ही 0-2 से पिछड़ चुकी इंग्लिश टीम के लिए यह टेस्ट भी कठिन साबित होता दिख रहा है, ऊपर से तकनीक की गलतियों ने उसकी परेशानी और बढ़ा दी है।
मैच के पहले दो दिनों में ही डीआरएस के तहत स्नीकोमीटर ने तीन बड़े मौकों पर चूक की है। दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही मामलों में विकेटकीपर बल्लेबाज क्रीज पर थे और फैसलों का सबसे ज्यादा नुकसान इंग्लैंड को उठाना पड़ा। हालांकि, तकनीक की इस नाकामी से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी भी खासे नाराज दिखे।
दूसरे दिन इंग्लैंड की पारी के 44वें ओवर में कप्तान पैट कमिंस की एक तेज बाउंसर इंग्लैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज जेमी स्मिथ के हेल्मेट की ओर आई। स्मिथ ने इसे खेलने की कोशिश की और गेंद हल्का सा किनारा लेकर स्लिप में खड़े उस्मान ख्वाजा की ओर गई। सवाल यह था कि गेंद बल्ले या ग्लव से लगी या सीधे हेल्मेट से स्लिप में पहुंची।
मैदान पर मौजूद अंपायर ने मामला तीसरे अंपायर को भेजा। रिप्ले में स्नीकोमीटर ने दिखाया कि गेंद बल्ले या ग्लव से नहीं लगी, बल्कि हेल्मेट से टकराकर स्लिप की ओर गई। पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण तीसरे अंपायर ने बल्लेबाज को नॉट आउट करार दे दिया। इस फैसले से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी संतुष्ट नहीं दिखे, क्योंकि उन्हें पूरा भरोसा था कि गेंद ग्लव से लगी थी।
इसी दौरान ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क का गुस्सा स्टंप माइक में रिकॉर्ड हो गया। उन्होंने स्नीकोमीटर को लेकर कहा, “यह अब तक की सबसे खराब तकनीक है।” स्टार्क ने आगे कहा कि स्नीकोमीटर को हटाने की जरूरत है, क्योंकि यहां यह ठीक से काम नहीं कर रहा और पहले भी गलती कर चुका है।
हालांकि, इसके बाद भी विवाद थमा नहीं। कमिंस के अगले ओवर में जेमी स्मिथ एक बार फिर फंसते नजर आए, जब पुल शॉट खेलते समय उनका बल्ला गेंद से पहले ही दूर चला गया। इस पर ऑस्ट्रेलियाई टीम ने डीआरएस की मांग की, जिससे एक बार फिर तकनीक पर सबकी नजरें टिक गईं।
एडिलेड टेस्ट में बार-बार हो रही इन तकनीकी चूकों ने डीआरएस और खासकर स्नीकोमीटर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर अब क्रिकेट जगत में बहस तेज होती दिख रही है।
